घटाकाश मठाकाश महाकाश एक ही है द्वैत मात्र परिधि का है-पं. प्रमोद
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),घटाकाश मठाकाश महाकाश एक ही है द्वैत मात्र परिधि का है-पं.प्रमोद।राईका बाग बैंक कॉलोनी स्थित श्रीसर्वेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में आयोजित भागवत कथा के दूसरे दिन व्यास पीठ से पंडित प्रमोद शास्त्री ने सर्वत्र ईश्वर पर चर्चा करते हुए कहा कि ईश्वर सर्वत्र है एवं कण-कण में व्याप्त है,अंतर मात्र परिधि का है। उन्होंने कहा कि घटाकाश,मठाकाश और महाकाश एक ही हैं द्वैत मात्र परिधि का है।
उन्होंने कहा कि घट अर्थात घड़े में जो आकाश है वही मठ अर्थात कमरे में है और जो मठ में आकाश है वही महाकाश अर्थात आकाश में है। तीनों में जो आकाश पृथक दिखाई दे रहा है वह एक ही है। उन्होंने कहा कि ईश्वर सर्वत्र है भिन्न भिन्न सत्ताओं में होने से उसका भान नहीं होता है। यहाँ जो यजमान हैं,वो भी भगवान हैं,श्रोता भी भगवान हैं और वाचक भी भगवान है,ईश्वर सर्वत्र है यही परम सत्य है।
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कार्यक्रम संयोजक डॉ.अजय त्रिवेदी ने बताया कि बैंक कॉलोनी महिला मण्डल एवं धार्मिक कथा आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे श्रीमद भागवत सप्ताह की कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी कथा श्रवण के लिए उपस्थित हुए। कथा का आरम्भ विजय सिंह, ममता सिंह व सत्यनारायण, सुनीता प्रजापति द्वारा पूजा करने के उपरांत हुआ।
