‘चिकित्सा में संवेदना और विज्ञान का संगम’

  • पीजीआईएमईआर में राष्ट्रीय सम्मेलन
  • ले.जनरल वेलु नायर ने दिया आशा माथुर ऑरेशन

चंडीगढ़(दूरदृष्टीन्यूज),’चिकित्सा में संवेदना और विज्ञान का संगम’।
मानवीय संवेदनाओं और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अद्भुत समन्वय का साक्षी बना पीजीआईएमईआर,चंडीगढ़, जहाँ सोमवार को आयोजित 3rd Annual Waldenstrom Macroglobulinemia India Meeting में देशभर के प्रमुख विशेषज्ञ, चिकित्सक और शोधकर्ता एकत्रित हुए।

इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य आकर्षण रहा प्रो.डॉ.आशा माथुर ओरेशन,जिसे सुप्रसिद्ध हेमेटो-ऑन्को लॉजिस्ट लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ)वेलु नायर ने प्रस्तुत किया। अपने प्रेरक और विचारोत्तेजक वक्तव्य में उन्होंने अत्याधुनिक चिकित्सा उपचारों के साथ करुणा,मानवीय जुड़ाव और समग्र देखभाल की आवश्यकता को रेखांकित किया,जिससे उपस्थित सभी विशेषज्ञ गहराई से प्रभावित हुए।

इस अवसर पर प्रो.डॉ.आशा माथुर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके असाधारण योगदान को स्मरण किया गया। वे एक आदर्श शिक्षिका,प्रतिष्ठित विदुषी एवं संवेदनशील चिकित्सक थीं, जिन्होंने न केवल चिकित्सा शिक्षा को समृद्ध किया,बल्कि अपने व्यक्तित्व से असंख्य जीवनों को प्रेरित किया।उनका जीवन सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों का अद्वितीय उदाहरण रहा।

14 जोड़ी ट्रेनों में बढाये विभिन्न श्रेणी के डिब्बे

सम्मेलन के विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में रोग के आणविक पहलुओं,नवीन उपचार पद्धतियों,संक्रमण जोखिम प्रबंधन तथा देशभर के संस्थानों द्वारा साझा किए गए अनुभवों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस मंच ने विशेषज्ञों के बीच ज्ञान-विनिमय और सहयोग को नई दिशा प्रदान की।

देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता ने इस सम्मेलन को राष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत सार्थक और प्रभावशाली बनाया।इस सफल आयोजन के पीछे प्रो. (डॉ) पंकज मल्होत्रा एवं डॉ.चरण प्रीत सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व,उत्कृष्ट समन्वय और समर्पित प्रयासों की विशेष सराहना की गई। उनके मार्गदर्शन में यह सम्मेलन उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता और सुव्यवस्थित संचालन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा।

कार्यक्रम में केयरगिवर्स आशा सोसाइटी की सहभागिता भी उल्लेखनीय रही,जो रोगी देखभाल में परिवारजनों की भूमिका को सशक्त बनाने,प्रशिक्षण व जागरूकता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह सम्मेलन न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा,बल्कि चिकित्सा में संवेदनशीलता, सहयोग और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रेरक संदेश भी दे गया।