आयुर्वेद की वैश्विक पहचान बढ़ाने में युवा चिकित्सकों की भूमिका अहम-राज्यपाल

  • ज्ञानार्जन के लिए शिक्षकों एवं छात्रों के बीच सामंजस्य आवश्यक -राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े
  • आयुर्वेद विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में 1391 विद्यार्थियों को उपाधियां
  • 5 को स्वर्ण पदक

जोधपुर,आयुर्वेद की वैश्विक पहचान बढ़ाने में युवा चिकित्सकों की भूमिका अहम-राज्यपाल डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय,जोधपुर के सुश्रुत सभागार में शुक्रवार को विश्वविद्यालय का 9वां दीक्षांत समारोह भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता राजस्थान के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने की।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथियों में राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री एवं आयुष मंत्री डॉ.प्रेमचंद बैरवा,कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल तथा पद्मश्री डॉ. एचआर नागेन्द्र शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक शैक्षणिक शोभायात्रा,राष्ट्रगीत,राष्ट्रगान,दीप प्रज्वलन तथा भगवान धन्वंतरि वंदना के साथ हुई। इसके बाद कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविन्द सहाय शुक्ल द्वारा विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति के कर कमलों द्वारा पीएचडी आयुर्वेद के शोधर्थिओं को उपाधि व बीएएमएस, बीएचएमएस बीयूएमएस, बीएनवाईएस एवं बीएससी नर्सिंग आयुर्वेद में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं प्रमाण पत्र दिए गए।

दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के 1391विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें आयुर्वेद संकाय के 16 शोधार्थियों को पीएचडी,जबकि स्नातकोत्तर स्तर पर आयुर्वेद के 133 और होम्योपैथी के 12 विद्यार्थियों को एमडी/एमएस की उपाधि प्रदान की गई।

स्नातक स्तर पर बीएएमएस के 709, बीएचएमएस के 236, बीयूएमएस के 108,योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के 114 तथा बीएससी आयुर्वेद नर्सिंग के 63 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस प्रकार समारोह में कुल 16 पीएचडी, 145 स्नातकोत्तर तथा 1230 स्नातक उपाधियां प्रदान की गईं।

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समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कुल 6 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। बीएएमएस (बैच 2019) में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर पीजीआईए आयुर्वेद कॉलेज, जोधपुर की मनीषा कुमारी को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक के साथ डाबर इंडिया लिमिटेड की ओर से अतिरिक्त स्वर्ण पदक दिया गया।

इसी प्रकार बीएनवाईएस (बैच 2019) में स्वास्थ्य कल्याण योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय,जयपुर की आशना जांगिड़,बीएससी आयुर्वेद नर्सिंग (बैच 2020) में यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ बीएससी नर्सिंग आयुर्वेद, जोधपुर के ब्रजभूषण सिंह तंवर, तथा बीएचएमएस (बैच 2019) में स्वास्थ्य कल्याण होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज,जयपुर की पूजा विजयवर्गीय को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। इसी तरह बीयूएमएस (बैच 2019) में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ यूनानी, टोंक की निदा खान को भी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े और अन्य मंचस्थ अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय की ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी का वर्चुअल लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और समृद्ध चिकित्सा परंपरा है। उन्होंने नवदीक्षित विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान और कौशल से समाज की सेवा करें और आयुष चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में योगदान दें। ज्ञानार्जन के लिए शिक्षकों एवं छात्रों के बीच सामंजस्य आवश्यक है।

मुख्य अतिथि ने कहा कि आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की विश्वभर में स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने युवाओं से शोध और नवाचार के माध्यम से आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने उपाधि धारको से कहा कि माता- पिता एवं गुरुजनों के आशीर्वाद से ही आपको उच्च पायदान पर पहुंचने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है

उपमुख्यमंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राज्य सरकार आयुष चिकित्सा के विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और आयुर्वेद विश्वविद्यालय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति भारत की पहचान है और इसकी वैज्ञानिकता तथा प्रभावशीलता के कारण आज दुनिया भर में इसकी मांग बढ़ रही है।

पद्मश्री डॉ.एचआर नागेन्द्र ने अपने दीक्षांत भाषण में योग,आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए विद्यार्थियों को मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव द्वारा आभार ज्ञापन किया गया। इसके पश्चात राष्ट्रगीत,राष्ट्रगान और समूह फोटो सत्र के साथ 9वें दीक्षांत समारोह का समापन हुआ।