एमजीएच में गॉलब्लैडर के कैंसर का सफल ऑपरेशन

लीवर में संक्रमण होने से लीवर का 70 प्रतिष्ठा भाग भी निकाला

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),एमजीएच में गॉलब्लैडर के कैंसर का सफल ऑपरेशन।महात्मा गांधी हॉस्पिटल के गेस्ट्रो सर्जरी विभाग में पित्त की थेली(गॉलब्लैडर) के कैंसर का सफल ऑपरेशन,लीवर में संक्रमण होने से लीवर का 70% भाग भी निकाला।महात्मा गाँधी अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर फतह सिंह भाटी के अनुसार गेस्ट्रो सर्जरी विभाग में वर्तमान में प्रतिमाह 8-10 कैंसर के जटिल ऑपरेशन हो रहे हैं।

बाड़मेर निवासी मरीज भिया राम पित्त की थैली के कैंसर से पीड़ित था उसने कई अस्पताल में दिखाया लेकिन कैंसर काफ़ी बढ़ गया था और उसका संक्रमण लिवर में होने के साथ ही लिवर के दाहिने तरफ़ के हिस्से की खून की नली भी कैंसर की गाँठ ने जकड़ रखी थी। उसके पश्चात मरीज ने गैस्ट्रोसर्जन डॉक्टर दिनेश चौधरी को दिखाया तो उन्होंने मरीज को ऑपरेशन की सलाह दी साथ ही ये भी कहा कि लिवर का 70-75% हिस्सा भी कैंसर की गाँठ के साथ निकलना पड़ेगा।

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यह हुआ आपरेशन
रेडिकल कोलेसिस्टेक्टमी विथ एक्सटेंडेड राइट हेमी हिपेटेकटॉमी इसमें पित्त की थेली के कैंसर की गाँठ के साथ साथ लिवर के 70-75% भाग को भी निकालना पड़ता है।

जटिल था ऑपरेशन
इस ऑपरेशन में लीवर के हाईलम के पास सूक्ष्म विच्छेदन करके दाहिने और बायाँ हिस्से की आर्टरी,पोर्टल वेन और बाइल डक्ट को अलग करना पड़ता है और उसके बाद लिवर को लगभग मध्य से काटना पड़ता है जिसमे काफ़ी ज़्यादा रक्तस्राव से मरीज की जान को भी ख़तरा हो सकता है।

70-75-%लिवर निकालने के बाद क्या होता है ?
डॉक्टर दिनेश ने बताया कि अगर बाकी बचा हुआ लीवर सही है तो धीरे धीरे उसका आकार बढ़ कर सामान्य लीवर के समान हो जाता है। ऑपरेशन के साथ साथ ऑपरेशन के बाद की देखभाल भी काफ़ी चुनौतीपूर्ण रहती है,यदि बचा हुआ हिस्सा पर्याप्त नहीं होता तो लीवर फेल हो सकता है। इस मरीज में लिवर के दाहिने हिस्से की पोर्टल वेन इन्वॉल्व होने से लीवर का दाहिना हिस्सा भी निकलना जरूरी हो गया था।

ऑपरेशन करने वाली टीम
डॉक्टर दिनेश चौधरी,डॉक्टर गुनवी ओहरी,डॉक्टर गोविंद पुरी और डॉक्टर प्रशांत ने ऑपरेशन किया।ओटी इंचार्ज अरविंद अपूर्वा,नसिंग ऑफिसर गणपत खींची और कैलाश ने सहयोग दिया। निश्चेतना विभाग के डॉक्टर सरिता जनवेजा, डॉक्टर अनिशा और डॉक्टर जितेंद्र ने मरीज को निश्चेतना देने के साथ ही लीवर रिसेक्शन के समय रक्त स्त्राव को रोकने के लिए सेंट्रल वीनस प्रेशर को कम रखा।

ऑपरेशन 6 घण्टे चला। अभी मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और एक दो दिन में उसे छूटी दे दी जाएगी। इस ऑपरेशन की सफलता पर अस्पताल अधीक्षक डॉ फतेह सिंह भाटी और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर बीएस जोधा ने टीम को बधाई दी है।