राज्य उपभोक्ता आयोग जोधपुर पीठ
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),बीमा कंपनी को देरी से सूचना देना, पोस्टमार्टम के अभाव में संपूर्ण बीमा अस्वीकृत नहीं किया जा सकता। बीमा कंपनी को वाहन दुर्घटना की सूचना देरी से एवं दुर्घटना में मृत्यु के पश्चात पोस्टमार्टम नहीं होने के अभाव में बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकृति को राज्य उपभोक्ता आयोग ने गलत मानते हुए अपीलार्थी एवं वारिसान की अपील को स्वीकार करते हुए नोंन स्टैंडर्ड मानते हुए 11 लाख 25 हजार रुपए देने के आदेश दिए हैं।
आयोग के समक्ष सेतरावा निवासी पदम कुमार और वारिसान की ओर से जिला आयोग प्रथम द्वारा परिवाद को अस्वीकार किए जाने पर आयोग के समक्ष अपील प्रस्तुत करते हुए बताया कि स्व.दुर्ग सिंह ने अपने बोलोरो वाहन की बीमा पॉलिसी करवा रखी थी जिसमें पर्सनल एक्सीडेंट की शामिल था। सेतरावा के निकट अगस्त 2020 में रात्रि के समय अचानक नील गाय आ आने पर गाड़ी पलटी खा गई , सिर में गंभीर चोटे आई,उक्त दुर्घटना के कारण उसकी मृत्यु हो गई। सामाजिक रीति रिवाज के पश्चात पुलिस में प्रथम सूचना दर्ज करवाई। अप्रार्थीगण की ओर से बीमा कंपनी को 15 लाख रुपए का दावा पेश किया। बीमा कंपनी ने विभिन्न आपत्तियों के आधार पर दावा अस्वीकार कर दिया। अपीलार्थी ने जिला आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया जो अस्वीकार हो गया।
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जिला आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य आयोग जोधपुर पीठ में अपील प्रस्तुत की। बीमा कंपनी टाटा एआईजी की ओर से बहस में बताया कि दुर्घटना के 2 माह 5 दिन बाद प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई है,जबकि बीमा शर्त के अनुसार अतिशीघ्र पुलिस रिपोर्ट करनी चाहिए या बीमा कंपनी को सूचित करना चाहिए बीमा कंपनी ने परिवाद को अपरिपक्व बताया तथा संबंधित दस्तावेज़ पेश नहीं किए इस आधार पर क्लेम अस्वीकृत किया है। आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छावाहा,सदस्य न्यायिक सुरेंद्र सिंह,सदस्य लियाकत अली ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर उपलब्ध दस्तावेज,साक्ष्य,न्यायिक दृष्टांत को देखकर अपने निर्णय में कहा कि पुलिस द्वारा डॉक्टर के बयान के आधार पर प्रस्तुत दस्तावेज से स्पष्ट होता है कि दुर्ग सिंह के सिर में चोटों से खून बह जाने के कारण दौराने उपचार मृत्यु हुई है।
विपक्षी पुलिस कार्रवाई के लिए डाक से भी सूचित किया गया था जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायालय से आदेश प्राप्त कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई द्य दुर्ग सिंह को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया इसका कोई आधार नहीं है। परिवादिनी द्वारा पोस्टमार्टम नहीं करवाए जाने के कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश नहीं की जा सकी। अंतिम रिपोर्ट भी बाद अनुसंधान विलंब से पेश होने के कारण प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
आयोग ने अपने निर्णय के कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट देरी से दर्ज हुई है और बीमा पॉलिसी का उल्लंघन हुआ है तो मात्र इस आधार पर संपूर्ण क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। आयोग ने अपील स्वीकार करते हुए 15 लाख रुपए की नोंन स्टैंडर्ड आधार पर 75 फीसदी राशि 11 लाख 25 हजार रुपए परिवाद प्रस्तुत की तिथि से 9 फीसदी ब्याज एवं अपील में के रूप में 10000 देने के आदेश देते हुए अपील स्वीकार की।
