नेशनल डेंटिस्ट डे पर आयुर्वेद विश्वविद्यालय में विशेष कार्यशाला

  • आयुर्वेद के जरिए मुख स्वास्थ्य पर हुआ मंथन
  • विशेषज्ञों ने दंत रोगों की रोकथाम में आयुर्वेद की भूमिका पर डाला प्रकाश

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),नेशनल डेंटिस्ट डे पर आयुर्वेद विश्वविद्यालय में विशेष कार्यशाला। डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय,जोधपुर में शुक्रवार को ‘नेशनल डेंटिस्ट डे’ के अवसर पर मुख एवं दंत स्वास्थ्य को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास केंद्र तथा स्नातकोत्तर शालाक्य तंत्र विभाग के संयुक्त सहयोग से आयोजित हुआ,जिसमें आयुर्वेद के माध्यम से दंत रोगों की रोकथाम और उपचार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

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यह आयोजन विश्वविद्यालय के पीजीआईए सेमीनार हॉल में दोपहर 3 बजे से किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने की। शुरुआत अतिथियों के स्वागत से हुई,जिसमें सीएचआरडी के निदेशक डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए दंत स्वास्थ्य के महत्व और इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु प्रो. शुक्ल ने कहा कि आज की आधुनिक जीवन शैली में दंत समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं,ऐसे में आयुर्वेदिक सिद्धांत और पारंपरिक उपचार पद्धतियां दंत रोगों की रोकथाम और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में मुख स्वच्छता,दंतधावन,गंडूष और कवल जैसे उपायों के माध्यम से दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने की प्रभावी विधियां वर्णित हैं।

कार्यशाला के दौरान दो प्रमुख विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। शालाक्य तंत्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ.ज्योति चारण ने ‘मसूड़ों की सूजन (जिंजिवाइटिस) में आयुर्वेद की भूमिका’ विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि आयुर्वेद में कई औषधीय पौधों और उपचार पद्धतियों के माध्यम से मसूड़ों की सूजन को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नियमित दंतधावन,औषधीय काढ़ों से कुल्ला और संतुलित आहार दंत स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक होते हैं।

इसके अलावा संजीवनी आयुर्वेद अस्पताल की डेंटल सर्जन डॉ कंचन भाटी ने ‘सामान्य दंत चिकित्सा का परिचय’ विषय पर जानकारी देते हुए दांतों की संरचना,सामान्य दंत रोगों और उनके उपचार के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों और शोधार्थियों को दांतों की नियमित जांच और सही देखभाल के महत्व से भी अवगत कराया।

कार्यक्रम पीजीआईए के प्राचार्य प्रो. चंदन सिंह,शालाक्य तंत्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजबीर सिंह,सहित विश्वविद्यालय के अनेक संकाय सदस्य,शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।कार्यक्रम के अंत में पीजीआईए जोधपुर के प्राचार्य प्रोफेसर चंदन सिंह ने सभी अतिथियों,वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक होती हैं तथा आयुर्वेद और आधुनिक दंत चिकित्सा के समन्वय को बढ़ावा देती हैं।

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