जोधपुर, रेल मंडल द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय रेल समपार फाटक दिवस पर रेल फाटकों पर सुरक्षित संचालन की विशेष जांच की गई। अन्तर्राष्ट्रीय समपार फाटक दिवस पर 10 जून को जोधपुर रेल मंडल पर विशेष अभियान के तहत सभी रेल समपार फाटकों पर सुरक्षित रेल संचालन से संबंधित सभी पहलुओं की जांच की गई।
उत्तर पश्चिम रेलवे के जनसम्पर्क अधिकारी गोपाल शर्मा ने बताया कि जोधपुर मंडल रेल प्रबन्धक गीतिका पाण्डेय ने शाम को अचानक बनाड़- जाजीवाल के मध्य स्थित रेल समपार फाटक संख्या सी 161 पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया। उन्होंने रेल फाटक के संचालन से संबंधित सभी उपकरणों का उपयोग रेलवे गेटमैन से करवाया तथा उनके इस्तेमाल की क्षमता को देखा।
पाण्डेय ने कार्यरत गेटमैन के आपात स्थिति में उठाए जाने वाले उपायों तथा समपार फाटक की कार्यप्रणाली से संबंधित नियमों के ज्ञान को परखा। रेलवे समपार फाटक सी 161 पर सभी उपकरणों को उचित रुप में रखने तथा नियमों की जानकारी अच्छी तरह रखने के लिये कार्यरत गेटमैन राम किशोर को पुरस्कार देने की घोषणा की। इससे पूर्व जोधपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे कलाकारों द्वारा रेलवे फाटक को पार करते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया।
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जोधपुर रेल मंडल अन्तर्राष्ट्रीय समपार फाटक दिवस पर विशेष अभियान चलाकर रेल समपार फाटकों पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया गया। जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक गीतिका पाण्डेय के निर्देशन में जोधपुर रेल मंडल के सभी शाखा अधिकारी तथा मंडल की फील्ड यूनिट में कार्यरत अधिकारी,वरिष्ठ सुपरवाइजर तथा संबंधित कर्मचारी रेल फाटकों पर संरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की गई तथा सड़क मार्ग का इस्तेमाल करने वालों को रेलवे फाटक पार करते समय सजग रहने तथा सावधानी अपनाने के लिये जागरुक किया गया। रेलवे अधिकारियों द्वारा रेल फाटकों पर संरक्षा उपकरणों व व्यवस्थाओं की गहनता से जांच की गई तथा कार्यरत कर्मचारियों को नवीनतम प्रावधानों से अवगत कराया।
इस अवसर पर जोधपुर मंडल में समस्त रेलवे फाटकों की जाँच के साथ-साथ आम नागरिकों को भी फाटक पार करने के संबंध में जागरूक किया गया। इस आयोजन के माध्यम से वाहन चालकों को रेल पथ संरक्षा, सावधानी व नियमों के अनुसार रेलवे क्रोसिंग का इस्तेमाल करने की जागरूकता दी गई। उल्लेखनीय है कि जोधपुर रेल मंडल पर वर्ष 2018-19 में कुल 276 मानव रहित समपार फाटक थे। इन पर दुर्घटना होने का सबसे अधिक खतरा रहता था। रेलवे द्वारा एक योजना के तहत इन फाटकों को अंडर पास (आरयूबी) बनाकर तथा चौकीदार की नियुक्ति से बंद किया जा चुका है। इसके पश्चात रेल समपार फाटकों पर दुर्घटना में अभूतपूर्व कमी आई है।