जैविक खेती में सामाजिक सहयोग का त्योहार है शिवरात्रि
- शिवरात्रि पर विशेष
- शिवरात्रि-सत्यम शिवम सुंदरम
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),जैविक खेती में सामाजिक सहयोग का त्योहार है शिवरात्रि। शिवरात्रि पर शिव की आराधना पूजन में आक,धतूरा, बेलपत्र,दूबघास,बेर को शिवलिंग पर समर्पित कर दूध मिश्रित जल चढ़ाया जाता है। आयुर्वेद में दूध और गौमूत्र सभी विष शोधन के काम में लिए जाते हैं।
यही उपयोग दूध का यहाँ किया गया है, ताकि आक,धतूरा के विष को शोधित कर बेलपत्र के औषधीय उपयोग और बेर का मिठास,गेंदे के प्रतिरक्षक और अन्य गुणों को मिलकर तथा दूबघास जो खेत से बहुत मुश्किल से निकलती हे उसे इसके साथ यह एक सम्पूर्ण खेती के लिए प्रतिरक्षक मिश्रण बन जाता है,जो पूरे समाज द्वारा मंदिरों मैं इकठा किया जाता है,ताकि खेती या आयुर्वेद में इसका प्रयोग हो सके।
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आज हम इस परंपरा को भूल गए और अब शिवरात्रि के दूसरे/अगले दिन इसे कचरे के रूप दिया फेंक दिया जाता है।
आप सभी इस खेती के अमृत को कल मंदिरों से इकट्ठा कर खाद में मिलाएं या पानी के साथ रस निकाल कर सिंचाई या छिड़काव में प्रयोग कर खेती को सत्यम शिवम सुंदरम बना सकते हैं।
-एके शर्मा,वैज्ञानिक
