चैक अनादरण प्रकरण में एक वर्ष की सजा और ग्यारह लाख का जुर्माना
जोधपुर,चैक अनादरण प्रकरण में एक वर्ष की सजा और ग्यारह लाख का जुर्माना। विशिष्ठ महानगर मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट प्रकरण) संख्या 04, जोधपुर महानगर मजिस्ट्रेट सुमन चौधरी द्वारा गणेश गहलोत बनाम महेन्द्र सिंह गहलोत के प्रकरण में अभियुक्त महेन्द्र सिंह गहलोत को अलग-अलग पांच प्रकरणों में एक वर्ष की सजा व कुल ग्यारह लाख रुपए का जुर्माना सुनाया है। परिवादी की ओर से पीडी दवे,बालकिशन भादू, रूचि परिहार ने पैरवी कर पक्ष रखा।
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परिवादी द्वारा न्यायालय के समक्ष परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि महेन्द्र सिंह गहलोत द्वारा ऋण चुकाने,घरेलू व व्यापारिक आवश्यकता बताकर रुपए मांगे जो 8.80 लाख रुपए नगद प्रदान किए,इस संदर्भ में एक एग्रीमेन्ट भी दोनों पक्षों के बीच लिखा गया,इस संदर्भ में कुल पांच चैक परिवादी को दिये गए जो तय समय पर रुपए न देने पर बैंक में प्रस्तुत करने पर अनादरित हो गए जिसके पश्चात् विधिवत नोटिस देने पर भी भुगतान न करने पर न्यायालय के समक्ष अलग-अलग कुल पांच प्रकरण प्रस्तुत किए गए। न्यायालय द्वारा अलग-अलग प्रकरणों सुनवाई कर महेन्द्र सिंह गहलोत,माता का थान,पूंजला,जोधपुर निवासी को 138 पराक्रम्य लिखत अधिनियम में एक वर्ष का साधाराण कारावास तथा ग्यारह लाख रुपए जुर्माने से दण्डित करने का आदेश पारित किया,साथ ही अदम अदायगी जुर्माना में तीन माह का साधारण कारावास भी अलग से भुगतने का आदेश पारित किया है।
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