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भगवान श्रीराम से सीखें संस्कृति और संस्कार-सोमेश्वर गिरी

  • द एजुकेशन एकेडमी का रामायण थीम पर वार्षिक उत्सव
  • विद्यार्थी व अभिभावक हुए राममय
  • भगवान श्रीराम के जीवन से संबंधित प्रस्तुति से बच्चों में नए जोश का संचार

जोधपुर(डीडीन्यूज),भगवान श्रीराम से सीखें संस्कृति और संस्कार- सोमेश्वर गिरी। अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर बनने के बाद वैसे तो पूरे भारतवर्ष में भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा आस्था और भक्ति और अधिक बढ़ गई है लेकिन किसी शिक्षण संस्थान में भगवान श्रीराम के जीवन से ओतप्रोत रामायण जैसे ग्रंथ की संस्कृति से बच्चों और उनके अभिभावकों को रूबरू कराने के लिए रामायण थीम पर वार्षिक उत्सव संभवतः पहली बार द एजुकेशन एकेडमी द्वारा नए उदाहरण के रूप प्रस्तुत किया गया।

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इस अवसर पर मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर सोमेश्वर गिरी ने विद्यार्थियों से भगवान श्रीराम की तरह ही संस्कृति और संस्कार को अपनाने का आह्वान किया। जोधपुर के कुड़ी हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र स्थित द एजुकेशन एकेडमी के रामायण थीम पर आयोजित वार्षिक उत्सव के संयोजक हिमांशु गुप्ता ने बताया कि विद्यालय के विद्यार्थियों को भगवान श्रीराम के जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से इस बार महामंडलेश्वर सोमेश्वर गिरी के सानिध्य में पूरा वार्षिक उत्सव भगवान श्रीराम और उनमें आस्था रखने वाले लाखों श्रद्धालुओं को समर्पित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष चंद्रलाल खावा ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अशोक पटेल और समाज सेवी विमला गट्टानी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे।

विद्यार्थियों ने भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर परिवार से मिले संस्कारों और राजपाट की जगह वचन निभाने की परंपरा का निर्वहन करने से संबंधित आयोजन प्रस्तुत कर पूरे कार्यक्रम को रामायण बेस पर संजोया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर सोमेश्वर गिरी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपनी संस्कृति और संस्कार को जिस रूप से अपनाया इस वजह से आज उनकी मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पहचान है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने माता-पिता और गुरु का हमेशा मान सम्मान किया और उनसे सीखने चले गए। उसी के चलते उनमें त्याग समर्पण और सम्मान की भावना देखने को मिलती है। उन्होंने इस अवसर पर द एजुकेशन एकेडमी द्वारा रामायण ग्रंथ के आधार पर वार्षिक उत्सव की थीम रखने पर बधाई दी और कहा कि इस नवाचार से निश्चय ही बच्चों में भगवान श्री राम से सीखने की प्रेरणा जागृत होगी।

उन्होंने मानवता पर जोर देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम की मां कौशल्या उनकी पहली गुरु थी और अपनी मां से सीखने के आधार पर ही उन्होंने अपने जीवन को खुशमय बनाया था। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृति और संस्कार अपनाते हुए भगवान श्रीराम के पद चिह्नो पर चलने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर अतिथियों ने विद्यार्थियों को हौसला अफजाई करते हुए उन्हें अलग-अलग क्षेत्र में विविध पुरस्कार प्राप्त करने पर पुरस्कृत किया।

पूर्व में द एजुकेशन एकेडमी के निदेशक अशोक कुमार गुप्ता, प्राचार्य नवीन कुमार और उप प्राचार्य प्रीति गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम के प्रारंभ में द एजुकेशन एकेडमी के निदेशक अशोक कुमार गुप्ता ने संस्थान की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।

उन्होंने एक वर्ष में विद्यार्थियों द्वारा किए गए नवाचार की जानकारी दी। रामायण जैसे ग्रंथ पर आधारित वार्षिक उत्सव पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर समाजसेवी दिनेश राजपुरोहित,सावित्री गुर्जर,अरविंद बारा,किशोर वेरावत,डॉ रामकिशोर बिश्नोई,मयंक दिवाकर,विजेंद्र शर्मा, ललित पालीवाल और पूजा बिश्नोई मौजूद थे।

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