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तृतीय श्रेणी अध्यापक की सेवा बर्खास्तगी पर अंतरिक रोक

  • राजस्थान हाईकोर्ट
  • प्रारम्भिक शिक्षा विभाग को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),तृतीय श्रेणी अध्यापक की सेवा बर्खास्तगी पर अंतरिक रोक। राजस्थान उच्च न्यायालय की एकलपीठ के न्यायाधीश आनन्द कुमार शर्मा ने चित्तौडगढ़ के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय,पारोली, पंचायत समिति चित्तौडगढ़ में तृतीय श्रेणी अध्यापक,लेवल-2 के पद पर पदस्थापित रामप्रसाद भारद्वाज के सेवा बर्खास्तगी आदेश 12 मार्च 2026 पर अन्तरिम रोक लगाई हैं।

रामप्रसाद भारद्वाज को सेवा से स्वैच्छिक अनुपस्थित रहने के कारण जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) प्रारम्भिक शिक्षा, चित्तौडगढ़ द्वारा अपने आदेश 12 मार्च 2026 के द्वारा सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इस बरखास्तगी के आदेश से व्यथित होकर प्रार्थी ने अपने अधिवक्ता दिनेश सुथार के माध्यम से एक रिट याचिका राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर बैंच के समक्ष प्रस्तुत की।
उच्च न्यायालय के समक्ष प्रार्थी के अधिवक्ता का यह तर्क रहा कि जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) प्रारम्भिक शिक्षा,चित्तौडगढ़ द्वारा जो सेवा बरखास्तगी आदेश 12 मार्च 2026 पारित किया गया हैं वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों एवम् राजस्थान सेवा नियमों में उल्लेखित निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया की पूर्णरूपेण अवहेलना करते हुए पारित किया गया है।

राज्य उपभोक्ता आयोग जोधपुर पीठ

प्रार्थी के अधिवक्ता ने बताया कि राजस्थान सेवा नियमों के नियम 86 में विशेष रूप से यह प्रावधान दिया गया हैं कि उप-नियम 86(1) एवम् 86(2) के प्रावधानों के होते हुए भी अनुशासनात्मक प्राधिकारी सबंधित सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण,नियंत्रण और अपील) नियमोंश् के तहत विभागीय कार्यवाही शुरू कर सकता है,जो जान-बूझकर एक महीने से अधिक अवधि तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है और यदि उसके विरुद्ध डयूटी से जान-बूझकर अनुपस्थित रहने का आरोप सिद्ध हो जाता है, तो ही उसे सेवा से हटाया जा सकता है।

प्रार्थी के अधिवक्ता का यह भी तर्क रहा कि सेवा से हटाने (रिमूव) जैसी बड़ी सजा देने से पहले राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण,नियंत्रण और अपील) नियमो के तहत विभागीय जाँच किया जाना अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। जबकि प्रस्तुत मामले में बिना अनुशासनात्मक कार्यवाही किये एवं बिना अवसर प्रदान किये सीधे ही प्रार्थी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया,जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्तों एवं राजस्थान सेवा नियमों में उल्लेखित निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया की पूर्णरूपेण अवहेलना है।

प्रार्थी के अधिवक्ता द्वारा दिये गये तर्को से सहमत होते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय ने जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) प्रारम्भिक शिक्षा,चित्तौडगढ़ द्वारा रामप्रसाद भारद्वाज के विरूद्ध जारी किये सेवा बर्खास्तगी के आदेश 12 मार्च 2026 पर अन्तरिम रोक लगाते हुए प्रारम्भिक शिक्षा विभाग को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया।