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स्थाई लोक अदालत के नौ सदस्यों को सेवा विस्तार के लिए प्रमुख विधि सचिव को निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),स्थाई लोक अदालत के नौ सदस्यों को सेवा विस्तार के लिए प्रमुख विधि सचिव को निर्देश। राजस्थान हाइकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश डॉ पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश संदीप शाह ने देश के आम नागरिक के त्वरित, सुलभ और कम खर्चीले न्याय के उद्देश्य से गठित स्थाई लोक अदालत को कोरम के अभाव में क्रियानशील नहीं होने को पीड़ादायक बताते हुए राज्य सरकार के सात स्थाई लोक अदालत में 9 सदस्यों के कार्यकाल को बढ़ाने से राज्य सरकार द्वारा नकारने को गलत बताते हुए तत्काल प्रभाव से 9 सदस्यों का सेवा विस्तार करने का निर्देश सरकार के प्रमुख विधि सचिव को दिया है।

हाईकोर्ट द्वारा स्वप्रेरित दायर जनहित याचिका में राजस्थान हाइकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने प्रार्थना पत्र दायर कर कहा कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने गत 19 जनवरी को सात स्थाई लोक अदालत अजमेर, अलवर,भरतपुर,बीकानेर और बूंदी के एक एक सदस्य तथा जयपुर महानगर द्वितीय तथा जालोर के दोनों सदस्यों का कार्यकाल फऱवरी माह में समाप्त हो रहा है,सो एक साल का सेवा विस्तार दिया जाएं।

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राज्य सरकार के प्रमुख विधि सचिव ने 9 फरवरी को उनके आग्रह को सिरे से खारिज कर दिया। प्रार्थी की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिसोदिया और अधिवक्ता अनिल भंडारी ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 में अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पांच साल अथवा 65 वर्ष आयु तक तय है सो जिन सदस्यों का सेवा विस्तार से इनकार किया गया है, उनकी नियुक्ति दो साल पहले ही हुई है और यदि उनका सेवा विस्तार नहीं हुआ तो राज्य की काफी स्थाई लोक अदालत की न्यायिक कार्यवाही ठप हो जाएगी।

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद,अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार और महावीर सिंह बिश्नोई ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण ने इन सदस्यों की नियुक्ति ही एक वर्ष वास्ते की थी और एक बार उनके आग्रह को स्वीकार कर एक साल उनकी सेवा विस्तारित की थी सो अब इन पदों पर नई भर्तियां ही की जा सकती है। प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता संदीप पाठक ने कहा कि नियमनुसार इन सदस्यों की सेवा में विस्तार किया जाना चाहिए।

राजस्थान हाइकोर्ट की खंडपीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश डॉ पीएस भाटी और न्यायाधीश संदीप शाह ने कहा कि स्थाई लोक अदालतों का गठन आम नागरिक के हितार्थ त्वरित, सुलभ और कम खर्चीले न्याय व्यवस्था के तहत किया गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में 36 स्थाई लोक अदालत गठित है और प्रति स्थाई लोक अदालत का न्यूनतम कोरम दो का निर्धारित है और प्रदेश में ऐसी स्थिति बिलकुल भी नहीं आनी चाहिए कि कोरम के अभाव में एक भी स्थाई लोक अदालत की न्यायिक कार्यवाही ठप हो जाएं।

उन्होंने राज्य सरकार और प्रमुख विधि सचिव को निर्देश दिए कि सभी सातों स्थाई लोक अदालत के नौ सदस्यों का कार्यकाल जो फरवरी माह में समाप्त हो गया है, की सेवाएं अविलंब तत्काल प्रभाव से विस्तारित की जाएं।