जलवायु चुनौतियों से निपटने में IIT जोधपुर अग्रणी
- स्वच्छ ऊर्जा से स्मार्ट जल प्रबंधन तक
- डॉ.शोभना सिंह का शोध
- उच्च-तापीय ऊर्जा भंडारण और AIoT आधारित जल प्रबंधन के माध्यम से भारत के सतत विकास लक्ष्यों को सशक्त बना रहा है
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),जलवायु चुनौतियों से निपटने में IIT जोधपुर अग्रणी। ऊर्जा संक्रमण और जल संकट जैसी दोहरी चुनौतियों के बीच,वैज्ञानिक नवाचार सतत विकास का एक सशक्त आधार बनकर उभर रहा है। इसी दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (IIT जोधपुर) की डॉ.शोभना सिंह सह-प्राध्यापक, यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग एवं सह-डीन (अनुसंधान एवं विकास)का शोध स्वच्छ ऊर्जा के कुशल भंडारण और जल संसाधनों के बुद्धिमान प्रबंधन के नए मानक स्थापित कर रहा है।
IIT जोधपुर में एनर्जी कन्वर्ज़न एंड स्टोरेज रिसर्च लैब का नेतृत्व कर रहीं डॉ.सिंह और उनकी टीम इंजीनियरिंग विज्ञान को कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस के साथ जोड़ते हुए देश की दो प्रमुख आवश्यकताओं सतत ऊर्जा प्रणालियाँ और जल-संवेदनशील बुनियादी ढाँचा पर केंद्रित समाधान विकसित कर रही है।
डॉ.शोभना सिंह का कहना है कि आज वास्तविक चुनौती ऊर्जा उत्पादन नहीं,बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को कितनी दक्षता से संग्रहित और उपयोग किया जाए तथा जल संसाधनों का कितना बुद्धिमत्तापूर्ण प्रबंधन किया जाए,यह है। IIT जोधपुर में हम ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो स्केलेबल, किफायती और भारत के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
स्वच्छ ऊर्जा के लिए उच्च-तापीय थर्मल ऊर्जा भंडारण में अग्रणी शोध
सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की बढ़ती भागीदारी के साथ ऊर्जा की अनियमितता एक वैश्विक चुनौती बन गई है। डॉ.सिंह का शोध उच्च तापीय थर्मल ऊर्जा भंडारण प्रणालियों पर केंद्रित है, जो बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के लिए आवश्यक,भरोसेमंद और मांग आधारित ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित कर सकती हैं।
पारंपरिक बैटरियों की तुलना में थर्मल ऊर्जा भंडारण दीर्घकालिक भंडारण,अधिक ऊर्जा घनत्व,कम लागत और सरल प्रणाली डिज़ाइन जैसे लाभ प्रदान करता है। IIT जोधपुर में शोध दल 700 डिग्री सेल्सियस तक कार्य करने में सक्षम अगली पीढ़ी की थर्मल ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ विकसित कर रहा है।
इस शोध की एक प्रमुख नवाचारात्मक उपलब्धि उच्च- चालकता धातु मिश्रधातुओं को फेज़ चेंज मटीरियल (PCM) के रूप में उपयोग करना है,जिन्हें कॉम्पैक्ट कैप्सूल में संलग्न किया जाता है। यह तकनीक 500 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर सटीक ऊष्मा भंडारण और तीव्र ऊर्जा मुक्त करने में सक्षम है। ये प्रणालियाँ 20 से 700 डिग्री सेल्सियस के तापमान दायरे में विद्युत उत्पादन,औद्योगिक प्रक्रियाओं,परिवहन और थर्मल प्रबंधन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
शोध में प्रायोगिक अध्ययनों के साथ-साथ उच्च-स्तरीय भौतिकी आधारित कम्प्यूटेशनल मॉडल का उपयोग किया जा रहा है,जिससे ऊष्मा और द्रव्यमान हस्तांतरण की जटिल प्रक्रियाओं को समझते हुए प्रणाली के प्रदर्शन का अनुकूलन किया जा सके।
डॉ.सिंह आगे जोड़ती हैं,हमारा दृष्टिकोण सामग्री चयन से लेकर पूर्ण प्रणाली डिज़ाइन तक सम्पूर्ण मूल्य-श्रृंखला को समाहित करता है। हमारा लक्ष्य ऐसे सुरक्षित, उच्च-प्रदर्शन और आर्थिक रूप से व्यवहार्य ऊर्जा भंडारण समाधान विकसित करना है,जो भारत के स्वच्छ ऊर्जा और मोबिलिटी परिवर्तन को गति दें।
जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए AIoT आधारित स्मार्ट जल प्रबंधन
ऊर्जा के साथ-साथ जल संसाधनों की स्थिरता भी डॉ.सिंह के शोध का एक प्रमुख आयाम है,विशेष रूप से राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों के संदर्भ में। IIT जोधपुर में उनकी टीम ने AIoT आधारित स्मार्ट जल निगरानी एवं प्रबंधन प्रणाली विकसित की है,जो रीयल-टाइम सेंसर,इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और मशीन लर्निंग आधारित प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स को एकीकृत करती है।
IIT जोधपुर परिसर में पहले ही एक स्मार्ट वॉटर सप्लाई ग्रिड स्थापित किया जा चुका है,जो जल प्रवाह और गुणवत्ता की निरंतर निगरानी करता है। यह प्रणाली किसी भी प्रकार की असामान्यता या संदूषण की स्थिति में त्वरित अलर्ट प्रदान करती है, जिससे जल वितरण, पुनः उपयोग और उपचार के लिए सटीक निर्णय संभव हो पाते हैं।
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इस सफलता के आधार पर, हाल ही में टीम ने जोधपुर शहर की झीलों के जल गुणवत्ता निगरानी हेतु एक पायलट परियोजना भी प्रारंभ की है, जिसमें स्वदेशी,कम लागत वाले सेंसर और एज कंप्यूटिंग तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
डॉ.सिंह के अनुसार स्मार्ट जल प्रणालियाँ नीति-निर्माताओं और प्रशासकों को डेटा-आधारित, क्रियान्वयन योग्य अंतर्दृष्टि प्रदान करती हैं। जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में जल सुरक्षा और जलवायु लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए ये प्रणालियाँ अत्यंत आवश्यक हैं।”
नेट-ज़ीरो लक्ष्यों और जलवायु लचीलापन की दिशा में वैश्विक प्रयासों के बीच,IIT जोधपुर अत्याधुनिक अनुसंधान को वास्तविक,प्रभावी तकनीकी समाधानों में रूपांतरित कर रहा है। थर्मल ऊर्जा भंडारण और बुद्धिमान जल प्रबंधन में हो रहे ये नवाचार भारत की सतत विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
