आईआईटी जोधपुर ने रचा कीर्तिमान

  • वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 86 आईपीआर दाखिल
  • सर्वाधिक वार्षिक आईपीआर दाखिले संस्थान की बढ़ती शोध क्षमता
  • राष्ट्रीय प्रासंगिकता और नवाचार-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाते हैं

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आईआईटी जोधपुर ने रचा कीर्तिमान। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (आईआईटी जोधपुर) ने अपने नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए कैलेंडर वर्ष 2025 में कुल 86 बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) दाखिल किए हैं। यह संस्थान की स्थापना के बाद किसी एक वर्ष में अब तक का सर्वाधिक आईपीआर दाखिला है,जो आईआईटी जोधपुर को शोध-आधारित नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास के एक सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करता है।

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वर्ष 2025 में दाखिल इन आईपीआर में 77 पेटेंट आवेदन,5 डिज़ाइन पंजीकरण और 4 कॉपीराइट शामिल हैं,जो उभरते एवं बहुविषयक क्षेत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करते हैं। आईपीआर दाखिलों में यह निरंतर वृद्धि,संकाय सदस्यों,शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के बीच बौद्धिक संपदा संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और सक्रिय सहभागिता को दर्शाती है। यह उपलब्धि पिछले वर्ष की तुलना में 150 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि को भी प्रतिबिंबित करती है।

पेटेंट आवेदन उन्नत अभियांत्रिकी समाधान,स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ, सामग्री एवं विनिर्माण प्रक्रियाएँ, ऊर्जा प्रणालियाँ और डिजिटल नवाचारों जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं। इनमें से कई आविष्कार वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान पर केंद्रित हैं,जिनमें किफायतीपन,सततता और विस्तार योग्यता पर विशेष बल दिया गया है,जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप है।

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रो.अविनाश कुमार अग्रवाल,निदेशक आईआईटी जोधपुर ने कहा कि आईपीआर दाखिलों की यह रिकॉर्ड संख्या उद्देश्यपूर्ण शोध के प्रति आईआईटी जोधपुर की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हमारा निरंतर प्रयास ऐसा ज्ञान सृजित करना रहा है जो प्रभाव उत्पन्न करे।ऐसे समाधान जो नैतिक हों,सतत हों और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप हों। मैं हमारे संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की प्रतिबद्धता और नवाचार भावना की सराहना करता हूँ।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्योग सहभागिता को और सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करती है। अब इन आईपी आर को लाइसेंस प्रदान कर उत्पादों और प्रक्रियाओं में परिवर्तित किया जाना चाहिए,जिससे देश के लिए संपदा सृजन हो और ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में सहायता मिले।

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आईपीआर दाखिलों में यह निरंतर प्रगति मजबूत संस्थागत तंत्र, सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं और निरंतर जागरूकता प्रयासों का परिणाम है। डीन (अनुसंधान एवं विकास) कार्यालय के अंतर्गत कार्यरत आईपीआर सेल,आविष्कारकों को बौद्धिक संपदा की पहचान,मूल्यांकन और संरक्षण की प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान करने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाता है। नीति समर्थन,जागरूकता कार्यक्रमों और शोध टीमों के साथ घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से सेल ने प्रारंभिक चरण में प्रकटीकरण और सुव्यवस्थित आईपी प्रबंधन को प्रोत्साहित किया है।

यह उपलब्धि भारत के शोध एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में आईआईटी जोधपुर की सुदृढ़ होती भूमिका को और मजबूत करती है। बौद्धिक संपदा सृजन और संरक्षण को सक्रिय रूप से बढ़ावा देकर संस्थान का उद्देश्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, उद्योग सहयोग और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को गति देना है,जिससे आत्म निर्भर भारत और नवाचार-आधारित विकास के राष्ट्रीय मिशन में सार्थक योगदान दिया जा सके।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में स्थापित आईआईटी जोधपुर शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध है,जहाँ बहुविषयक दृष्टिकोण और सामाजिक प्रभाव पर विशेष ध्यान दिया जाता है।