हाईकोर्ट ने कम की सौतेली बेटी से रेप के दोषी पिता की उम्रकैद की सजा
- दोषसिद्धि रखी बरकरार
- मेडिकल रिपोर्ट और नशे की बात को सजा घटाने में माना अहम
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),हाईकोर्ट ने कम की सौतेली बेटी से रेप के दोषी पिता की उम्रकैद की सजा। दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए सौतेली बेटी से रेप के दोषी पिता की उम्रकैद की सजा घटाकर 10 साल के कठोर कारावास में बदल दी है।
हाईकोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन सजा तय करते समय कुछ परिस्थितियों को ध्यान में रखा। इनमें घटना के समय आरोपी का नशे में होना और मेडिकल रिपोर्ट में पीडि़ता के प्राइवेट पार्ट पर चोट नहीं मिलना शामिल है। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि इन परिस्थितियों के बावजूद पीडि़ता की गवाही विश्वसनीय है और दोषसिद्धि को नहीं बदला जा सकता।
उदयपुर के सेशन कोर्ट ने 24 जनवरी 2013 को आरोपी लक्ष्मण रावत को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी। जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस आशुतोष कुमार की बेंच ने आरोपी लक्ष्मण रावत की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केवल सजा में बदलाव किया।
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कोर्ट ने जुर्माना बरकरार रखते हुए उम्रकैद को 10 साल के कठोर कारावास में बदल दिया। अपील कर्ता की ओर से एडवोकेट अनिल उपाध्याय और राज्य सरकार की ओर से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर सीएस ओझा ने पैरवी की। हाईकोर्ट ने सजा तय करते समय दो बातों पर गौर किया। पहली, पीडि़ता की मां ने अपनी गवाही में बताया था कि घटना के समय लक्ष्मण नशे में था। दूसरी, मेडिकल रिपोर्ट में पीडि़ता के निजी अंगों पर चोट के निशान नहीं मिले थे।
रिपोर्ट में यह भी जिक्र था कि पीडि़ता पहले भी यौन संबंध बना चुकी थी यानी सेक्सुअली एक्टिव मिली। हाईकोर्ट ने इन परिस्थितियों को सजा तय करते समय ध्यान में रखा। हालांकि,इसका मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने आरोपी को निर्दोष माना। हाईकोर्ट ने पीडि़ता की गवाही को विश्वसनीय माना और आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार रखी।
यानी कोर्ट ने यह माना कि आरोपी ने अपराध किया था,लेकिन सजा की अवधि तय करते समय इन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा। इसी आधार पर उम्रकैद की सजा घटाकर 10 साल का कठोर कारावास कर दिया गया। 25 हजार रुपए का जुर्माना पहले की तरह बरकरार रखा गया।
