चार प्रहर का हवन पूजन के साथ हरतालिका तीज का आयोजन संपन्न
- हरतालिक तीज पर मंगलवार को
शहर में हुए कई आयोजन - महिलाओं ने किया अखंड उपवास
- जोधपुर में रह रहे नेपाली समाज की ओर से हुआ रंगारंग कार्यक्रम
जोधपुर(डीडीन्यूज),चार प्रहर की पूजा के साथ हरतालिका तीज का आयोजन संपन्न। शहर में मंगलवार को हरतालिका तीज का पर्व बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। महिलाओं ने अखंड निर्जला उपवास कर चार प्रहर की पूजा की,चार प्रहर हवन कर अखंड सुहाग की कामना के साथ हरतालिका तीज का आयोजन संपन्न हुआ।
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हर वर्ष हरतालिका तीज मनाइ जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सुहाग और अमन चैन की कामना के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की चार प्रहर की विधिवत पूजा-अर्चना और हवन कर आशीर्वाद लेती हैं।सुहागिनें वैवाहिक जीवन में सुख और पति की दीर्घायु और कन्याएं सुयोग्य वर की कामना के लिए इस व्रत की बहुत मान्यता है।
महिलाएं व कन्याएं ने सोमवार रात्रि 12 बजे से निराहार बिना जल के रहकर चार प्रहर की पूजा हवन कर करते हुए मां पार्वती को सुहाग की सामग्री देवी को अर्पित की। तीज पूजन के लिए भगवान शिवजी,माता पार्वती और श्रीगणेश की रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा बना कर पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी में स्थापित की गई।
इसे क्लिक कीजिए ई रिक्शा में सवार महिला के बैग से पर्स चुराया,पर्स में रुपए और सोने की अंगूठी थी
यह भी मान्यता है कि यह दिन भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का प्रतीक है। इसे सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और कुशलता के लिए करती हैं,जबकि अविवाहित लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। हरितालीका का निर्जला व्रत रखा जाता है।
नेपाली समाज के कार्यक्रम संयोजक दिलिप नागरी,गणेश बोगटी, लाल नागरी ने बताया कि जोधपुर में निवासरत नेपाली समाज की तरफ से मंगलवार को चौपासनी रोड स्थित जुना खेड़ापति मंदिर के पीछे महर्षि गौतम सभा भवन के हॉल में दिन में 12 बजे से हरतालिका तीज का आयोजन हुआ। इस आयोजन में समाज की महिलाओं की ओर से रंगारंग कार्यक्रम किया गया। तीज के गीतों पर पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही।
उन्होंने बताया कि समाज की महिलाओं ने हरतालिका तीज पर्व बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। महिलाओं ने अखंड ब्रत रखा। महिलाएं एवं कन्याओं ने सोमवार रात्री 12 बजे से बिना जल निराहार रहकर अपने सुहाग के दीर्घायु और कन्याओं ने सुयोग्य वर की कामना से पूजा की।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव पार्वती की पूजन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। जिसमें महिलाओं ने तीज के लोक गीतों पर परम्परागत नृत्य की प्रस्तुति दी। इसमें महेश्वरी बोगटी,तारा नागरी, माया देवबा,करिश्मा बोगटी,गौरी आउजी, सानु बोगटी,हिमा आउजी,गीता साउद,मीना बोगटी,कल्पना देवबा,भगवती नेपाली, अमृता नेपाली,राधा नागरी, उर्मिला नागरी,सपना,कल्पना, आशा, चन्द्रा,संगीता,पूजा साउद, अन्जु आदि महिलाओ द्वारा परम्परागद वेशभूषा में नृत्य एवं सांस्कृति कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुवात मौलिक भाषा डेउडा गीत-सरो सन..झल्क हिमाल से शुरू किया गया,जिसमें दिलिप नागरी,गणेश बोगटी,लाल नागरी,खगेन्दर खडका,राम साउद,डम्मर खडका,राम बलायर,शेर खडका,अर्जुन बोगटी,अमर आउजी,प्रकाश नेपाली, नरेश पार्की,उत्तर नागरी,शेर आउजी,मान नागरी,ललित नागरी, गोपाल सिंह,ईन्दर नागरी,सागर आउजी,गजेन्दर बोगटी,महेन्दर बोगटी,आदित्य नागरी ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन प्रिया बोगटी ने किया,मन्तव्य हर्षी सिह ने दिया।
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