निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नियामक आयोग का गठन प्रक्रियाधीन-उप मुख्यमंत्री

राज्य के 10 निजी विश्वविद्यालयों में अनियमितताओं की जांच

जयपुर(दूरदृष्टीन्यूज),निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नियामक आयोग का गठन प्रक्रियाधीन- उप मुख्यमंत्री।उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.प्रेम चन्द बैरवा ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि फर्जी डिग्रीयां बांटने एवं अनियमितताओं की शिकायतों पर राज्य सरकार द्वारा 10 निजी विश्वविद्यालयों के विरूद्ध जांच के आदेश दिये गए हैं।

उन्होंने बताया कि फर्जीवाड़े के आरोपों के बाद विभाग द्वारा 07 जनवरी 2026 को ओपीजेएस विश्वविद्यालय चूरू का परिसमापन करते हुए संभागीय आयुक्त, बीकानेर को यहां का प्रशासक नियुक्त किया गया है तथा अनियमितताओं के दोषी कार्मिकों एवं दलालों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया गया है। इसी प्रकार मेवाड़ विश्वविद्यालय, चित्तौडगढ़ में भी फर्जीवाड़े के दोषी कार्मिकों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा शेष विश्वविद्यालयों की जांच प्रक्रियाधीन है।

डॉ.बैरवा ने बताया कि प्रदेश में निजी उच्च शिक्षा संस्थानों पर नियंत्रण एवं उनमें अनियमितताओं की रोकथाम के लिए नियामक आयोग के गठन की कार्रवाई की जा रही है। शीघ्र ही इसका प्रारूप तैयार कर विधि विभाग को परीक्षण के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक कालीचरण सराफ द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे।

उन्होंने बताया कि विगत सरकार द्वारा निजी उच्च शिक्षा संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विनियामक प्राधिकरण आयोग का गठन करने हेतु डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय,जयपुर के वीसी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। समिति द्वारा प्रस्तावित प्राधिकरण के विधेयक का प्रारूप तैयार कर राज्य सरकार को प्रेषित किया गया था। इसके पश्चात् राजस्थान प्राइवेट हायर एजूकेशन इस्टीट्यूशन रेगुलेटरी अथॉरिटी बिल-2023 का प्रारूप तैयार कर विधि विभाग को मूल्यांकन के लिए प्रस्तुत भी किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर इस विधेयक के प्रावधानों को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने तथा नवीन प्रारूप तैयार करने के लिए नई समिति का गठन किया गया है। प्रस्तावित बिल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आवश्यक प्रावधानों एवं निर्देशों को भी सम्मिलित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस नए प्रारूप को तैयार कर परीक्षण उपरांत शीघ्र विधि विभाग को प्रस्तुत किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि विभाग स्तर पर निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी गाइड लाइनों को संशोधित करने की प्रक्रिया भी जारी है। इससे पहले विधायक सराफ के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उप मुख्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 53 निजी विश्वविद्यालय संचालित है। उन्होंने इनकी सूची सदन के पटल पर रखी।

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उन्होंने कहा कि विभाग के नियंत्रणाधीन निजी विश्वविद्यालयों में से 10 निजी विश्वविद्यालयों के विरुद्ध अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त होने पर इनके विरूद्ध जांच के आदेश दिए गए हैं। इनमें ओपीजे एस विश्वविद्यालय चुरू,सिंघानिया विश्वविद्यालय झुंझुनूं,सनराईज विश्वविद्यालय अलवर,श्रीधर विश्वविद्यालय झुंझुनूं, मेवाड़ विश्वविद्यालय चित्तौडगढ, माधव विश्वविद्यालय सिरोही, रैफल्स विश्वविद्यालय अलवर,निर्वाण विश्वविद्यालय जयपुर,यूनिवसिर्टी ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर तथा जगदीश झाबरमल टिबरेवाला विश्वविद्यालय झुंझुनूं शामिल हैं। उन्होंने आदेशों की प्रति सदन के पटल पर रखी।

उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा ओपीजेएस विश्वविद्यालय चूरू,माधव विश्वविद्यालय सिरोही,जगदीश झाबरमल टिबरेवाला विश्वविद्यालय झुंझुनूं,सिंघानिया विश्वविद्यालय झुंझुनूं,भूपाल नोबल विश्वविद्यालय उदयपुर के विरूद्ध राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा 2022 में अनियमितताएँ पाए जाने पर इन विश्वविद्यालयों की समग्र जांच एसओजी के माध्यम से कराए जाने हेतु पत्र प्रेषित किया गया।

उन्होंने कहा कि पुलिस अधीक्षक एसओजी से प्राप्त सूचनानुसार प्रदेश में स्थित 01.ओपीजेएस विश्वविद्यालय, रावतसर कुजला, चूरू 02.सनराईज विश्वविद्यालय,अलवर के पदाधिकारी,03. सिंघानिया विश्वविद्यालय,पचेरी, झुंझुनूं, 04.श्रीजेजेटी विश्वविद्यालय,चुडेला, झुंझुनूं व 05.मेवाड़ विश्वविद्यालय, गंगरार,चित्तौड़गढ़ के खिलाफ बैक डेट में विभिन्न कोर्सेज की अंकतालिकाएं/ डिग्रीयां प्रदान करने के संबंध में शिकायतें मिली थीं। इस संबंध में ओपीजेएस विश्वविद्यालय के संचालक/मालिक जोगेन्द्र सिंह,पूर्व रजिस्ट्रार व पूर्व वाइस चांसलर सरिता कडवासरा, पूर्व रजिस्ट्रार जितेन्द्र यादव, अकाउटेंट संगीता कडवासरा व सुमित तथा ओपीजेएस विश्वविद्यालय के दलाल सुभाष चन्द्र,प्रदीप कुमार शर्मा,परमजीत सिंह,गंगासिंह,अवनीश कन्सल, अजय भरद्वाज,बाबुलाल उर्फ बाबु पटेल उर्फ बी एल पटेल व रवि त्यागी को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया गया।

इसी प्रकार मेवाड़ विश्वविद्यालय, गंगरार चित्तौड़गढ़ के तत्कालीन डीन फार्मेसी किशोर चन्द्रुल, कार्यालय सहायक राजेश सिंह राणावत व उप परीक्षा नियंत्रक सुशील कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया जाकर जेल भिजवाया गया। उन्होंने कहा कि प्रकरणों का अनुसंधान जारी है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग द्वारा समय-समय पर निजी विश्वविद्यालय को नियंत्रित किये जाने हेतु 28 मई 2024 एवं 09 अक्टूबर 2024 को पब्लिक नोटिस एवं आदेश जारी किये गये। उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए नियामक आयोग का गठन नीतिगत निर्णय से संबंधित है। इस हेतु परीक्षण प्रक्रियाधीन है।