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बोरवेल में गिरे बच्चे को बाहर निकालने का प्रयास जारी

देसी जुगाड़ से कोशिश -चिकित्सा मंत्री भी पहुंचे

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),बोरवेल में गिरे बच्चे को बाहर निकालने का प्रयास जारी। फलोदी जिले में बोरवेल में गिरे नौ वर्षीय भोमाराम को दूसरे दिन भी नहीं निकाला जा सका है। शुक्रवार सुबह बोरवेल में डाले गए कैमरे में बच्चे का मूवमेंट दिखना भी बंद हो गया है। रेस्क्यू टीम का कहना है करीब 30 फीट तक जाकर कैमरा फंस गया है।

लगातार रेस्क्यू के कारण बोरवेल के अंदर पानी भी भरना शुरू हो गया है। अब देसी जुगाड़ से बच्चे को निकालने की कोशिश तेज हो गई है। इधर, चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर भी मौके पर पहुंचे। बोरवेल से रेस्क्यू करने वाले देसी एक्सपर्ट मादाराम और उनकी टीम मौके पर है। लोहे के सरियों का जाल बनाकर बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।

33 ब्यूटी पार्लर और सैलून की जांच

उल्लेखनीय है कि गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे पूनिया की ढाणी में भोमाराम 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। वह 640 फीट की गहराई में अटका है। गांव मेड़ा पुरोहितान,बागोड़ा जालोर निवासी माधाराम सुथार और उनकी टीम ने राजस्थान में बोरवेल में गिरे अधिकांश बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला है।

यहां भी माधाराम और उनकी टीम के सदस्य जगमालराम सुथार, भीकाराम सुथार,नरपत कुमार,गेवाराम सुथार, परसराम, समनाराम, तेजाराम और हरदान राम पहुंचे हैं। मादाराम की टीम के लोगों ने बताया कि पहले पत्थर को निकाला जाएगा। उसके बाद बच्चे को निकालने के प्रयास किए जाएंगे। अंदर पानी भी है।

बोरवेल में फंसे बच्चे को बाहर निकालने के रेस्क्यू ऑपरेशन में पत्थर बड़ी चुनौती बन गया है। पत्थर बच्चे से करीब 30 फीट ऊपर फंसा होने के कारण पाइप और अन्य उपकरण अंदर पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में पत्थर को बाहर निकालने के लिए देसी जुगाड़ तैयार किया गया है। लोहे के एंगल को जोड़-जोडक़र एक विशेष उपकरण बनाया गया, जिसे पाइप के आकार में तैयार किया गया है। इसके जरिए बोरवेल में फंसे पत्थर को पकडक़र बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। पत्थर के बीच में फंसे होने से रेस्क्यू टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

अब इस देसी जुगाड़ की मदद से पत्थर हटाकर रेस्क्यू ऑपरेशन को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी है।
बोरवेल के पास ही परिवार और समाज के लोग बैठे हुए हैं। प्रशासन से भी वे लगातार बातचीत कर रहे हैं। देसी जुगाड़ से पत्थर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चे के चाचा सावताराम ने बताया कि कल से परिवार और समाज के लोग यहां भूखे बैठे हुए हैं। प्रशासन अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है, लेकिन अभी भी खाली हाथ है।