मोक्षदायिनी भागवत कथा का दिव्य प्रसंग: राजा परीक्षित को सुनाई गई अमृतमयी कथा का हुआ भावपूर्ण वर्णन
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),शहर के गोकुलेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। दूसरे दिन कथा वाचक शाकुंतलम शास्त्री ने राजा परीक्षित और शुकदेव मुनि के प्रसंग का अत्यंत मार्मिक एवं ज्ञानवर्धक वर्णन किया। कथा के दौरान कृष्णानन्द ने बताया कि जब राजा परीक्षित को अपने जीवन के अंतिम समय का ज्ञान हुआ,तब उन्होंने संसार के मोह- माया को त्यागकर भगवान की भक्ति का मार्ग अपनाया।
इस अवसर पर कथा वाचक ने कहा कि ऋषि शुकदेव मुनि ने उन्हें परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया,जिससे राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई। यह प्रसंग सिखाता है कि जीवन के अंतिम क्षणों में भी यदि मनुष्य सच्चे मन से भगवान का स्मरण करे,तो उसे मोक्ष प्राप्त हो सकता है।
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वृंदावन से राधे धर्म प्रचारक एवं कथा वाचक ने शुकदेव मुनि के दिव्य जन्म का भी सुंदर वर्णन करते हुए बताया कि वे जन्म से ही विरक्त,ज्ञानी और ब्रह्मज्ञानी थे, जिन्होंने संसार के बंधनों से मुक्त रहकर भगवान की भक्ति का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव विभोर होकर भक्ति रस में डूबे नजर आए और पूरा वातावरण “राधे-राधे, जय श्री कृष्णा” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आयोजकों ने सभी भक्तजनों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस पावन कथा का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त करें।
