एक स्त्री ने स्त्री को जन्म दिया और स्त्री उदास हो गई…
‘साहित्य संगम’ की काव्य गोष्ठी में वैचारिक रचनाओं की दमदार प्रस्तुति
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),एक स्त्री ने स्त्री को जन्म दिया और स्त्री उदास हो गई…।शहर की सबसे पुरानी साहित्यिक संस्था ‘साहित्य संगम’ की ओर से रेलवे स्टेशन क्षेत्र स्थित सेठ रघुनाथ दास परिहार धर्मशाला के सभागार में बुधवार को आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी में शहर के प्रतिष्ठित कवियों ने वैचारिक रचनाओं की प्रस्तुति देकर तेजी से बदलते परिवेश में समाज व इंसानी सोच,प्रेम,स्त्री और प्रकृति का विश्लेषण किया।
66 ई-मित्र कियोस्कों का आकस्मिक निरीक्षण
संस्था के अध्यक्ष इंदीवर परिहार ने बताया कि गोष्ठी में नामवर शाइर और कहानीकार हबीब कैफ़ी ने मौजूदा दौर के इंसान की फितरत और भूखे बच्चे को खाना खिलाने को इबादत की संज्ञा देते हुए गज़ल ‘दिखाकर छुपाना,छुपाकर दिखाना, इसी में समाया सारा जमाना’ एवं ‘इबादत की सूरत ही देखा है मैंने, किसी भूखे बच्चे को खाना खिलाना’, सुप्रसिद्ध गीतकार दिनेश सिन्दल ने प्रेम के शाश्वत सत्य की व्याख्या करते ‘प्रेम अंधा नहीं होता, अंधापन जाने के बाद ही होता है प्रेम’ और स्त्री के अंतर्मन की पीड़ा को उजागर करते कविता ‘एक स्त्री ने स्त्री को जन्म दिया और उदास हो गई’।कलाविद व कवि रमेश बोराणा ने आदमी की त्रासदी को रेखांकित करते ‘हर आदमी के भीतर बैठा है एक और आदमी,खुद के ही मकां में किराएदार हो गया आदमी’। गजलकार सैयद मुनव्वर अली ने गज़ल ‘हो जहां बारिश की खेती और फऱेबों के निशाँ,आदमी अब हो गया उस शहर सा आजकल’ प्रस्तुत कर खूब दाद बटोरी।
इसके अलावा गोष्ठी में रंग सृजनधर्मी प्रमोद वैष्णव ने सरकार, समाज और घर परिवार में प्रताडऩा झेल रहे इंसान की चुप्पी पर तंज कसते हुए कविता ‘हम शोक में डूबे रहे,पर सवाल करना भूल गए’, बुजुर्ग शाइर रजा मोहम्मद खान ने गजल ‘तारों ने टूटकर कहा-ये ज़िंदगी फना है’,कवि मुकेश मांडण ने समय और समाज की सच्चाई को रेखांकित करते हुए ‘स्वनिर्वासित हो रही हो या निर्वासित की जा रही हो तुम समय और समाज से ओ प्रज्ञा’, कुलदीप सिंह भाटी ने ‘मृत्यु से भय क्यों और किसलिए….’, रंगकर्मी रमेश भाटी नामदेव ने चन्द्रमा को अपनी हैसियत से रूबरू कराते ‘क्या चंदा तूने किया भूलकर गौर,तू जो चमक बिखेरता देता है कोई और’, राजेन्द्र प्रसाद खिंवसरा ने तरन्नुम में गीत ‘डूबते को सहारा हुआ,जबसे कोई हमारा हुआ’ सुनाकर खूब सराहना हासिल की।
