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जोधाणा वृद्धाश्रम में वरिष्ठजन संग बांटी दिवाली की खुशियां

  • मरुधरा लोक कला व संगीत सेवा संस्थान का आयोजन
  • अध्यक्ष डॉ स्वाति शर्मा ने टीम सहित लिया बुजुर्गों का आशीर्वाद
  • बुजुर्गों को करवाया स्नेह भोज

जोधपुर,जोधाणा वृद्धाश्रम में वरिष्ठजन संग बांटी दिवाली की खुशियां।दीपावली पर आम तौर पर अपने-अपने घरों पर ही दीपावली का त्यौहार मनाने या रिश्तेदारों के घर जाकर दीपावली की शुभकामनाएं देने और रामा श्यामा की परंपरा है। सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन मरुधरा लोक कला और संगीत सेवा संस्थान की टीम ने अध्यक्ष डॉ स्वाति शर्मा के नेतृत्व में जोधाणा वृद्धाश्रम जाकर न केवल बुजुर्गों का अभिनंदन कर आशीर्वाद दिया बल्कि इस अवसर पर मुंह मीठा कराने के साथ अपने हाथों से भोजन भी कराया।

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कार्यवाहक सचिव सुमन परिहार ने बताया कि जोधाणा वृद्ध आश्रम के संचालक रतन सिंह गहलोत द्वारा संचालित आश्रम में 40 से अधिक बुजुर्गों के साथ दीपावली के पर्व की खुशियां बांटने के उद्देश्य से अध्यक्ष डॉ स्वाति शर्मा टीम की डिंपल गौड़, अनिता टाक और रश्मि शर्मा सहित अन्य सदस्यों के साथ दीपावली के रामा श्यामा के मौके वृद्ध आश्रम में समाज सेवी मोहनलाल शर्मा,प्रेरणा शर्मा,श्वेता शर्मा,सौरभ शर्मा, निहारिका शर्मा,पर्व जोशी,रुद्राक्षी कौशिश,धनंजय कौशिश,नाव्या, स्वस्तिक,अद्विका ने भी सेवाएं दी।

इस अवसर पर डॉ स्वाति शर्मा ने परिवार और समाज के बुजुर्गों से मिलने वाले संस्कारों से लेकर शिष्टाचार के साथ जीवन में नैतिकता को अपनाते हुए सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा को हर व्यक्ति के जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जिंदगी में हम इतने अधिक व्यस्त हो गए हैं कि अपने परिवार के बड़ों और बुजुर्गों को भूलते जा रहे हैं जबकि यह भूल जाते हैं कि वे वट वृक्ष है जिन्होंने हम जैसे पौधों को तैयार किया है। आने वाले समय में यदि बड़ों और बुजुर्गों की सेवा के प्रति समर्पण नहीं रहा तो आने वाली पीढ़ी संस्कार विहीन हो जाएगी।

बुजुर्ग जीतमल ने खुशी जाहिर करते हुए बुजुर्गों की सेवा को चार धाम बताया। उन्होंने कहा कि अपने से बड़ों और बुजुर्गों से लिया गया आशीर्वाद हमेशा जीवन में काम आता है। जितना अधिक मान सम्मान हम अपने से बड़ों और बुजुर्गों को देते हैं उतना ही ईश्वर अपनी अनुकंपा बनाए रखते हैं। उन्होंने भगवान गणेश का उदाहरण देते हुए कहा कि अपने माता-पिता की परिक्रमा के कारण ही आज वे प्रथम पूज्य देव बने हैं।

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