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पाली सीएमएचओ के निलंबन पर रोक,चिकित्सा विभाग से जवाब तलब

हाईकोर्ट का आदेश

जोधपुर, राजस्थान उच्च न्यायालय ने पाली के तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. रामपाल मिर्धा के निलम्बन आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही स्वास्थ्य सचिव, राजस्थान सरकार सहित कार्मिक विभाग और उपशासन सचिव,चिकित्सा विभाग जयपुर को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। डॉ. मिर्धा को राज्य सरकार ने कुछ शिकायतों के आधार पर सात जनवरी को निलम्बित कर दिया था। डॉ. मिर्धा ने राज्य सरकार के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ता डॉक्टर रामपाल मिर्धा की ओर से अधिवक्ता यशपाल खि़लेरी ने याचिका पेश कर बताया कि याचिकाकर्ता राज्य स्तरीय चिकित्सा अधिकारी हैं।

वे वर्ष 2019 से पाली के सीएमएचओ पद पर नियुक्त हैं। उनकी गत वर्षों की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट (एसीआर) उत्कृष्ट है। चिकित्सा विभाग के अंतर्गत चल रही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की स्वास्थ्य योजनाओं जैसे टीबी उन्मूलन प्रोग्राम, पीसीपी एनडीटी लिंग जांच के विरुद्ध अभियान, खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ़ अभियान, चिरंजीव योजना, नियमित टीकाकरण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग व कोविड महामारी इत्यादि में उनके बेहतरीन प्रबंधन से गत सालों में पाली जि़ले को राजस्थान में उच्च स्थान दिलाया। इसके लिए राज्य स्तर पर उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। लेकिन झूठी शिकायतों व राजनीतिक कारणों से उन्हें सेवा से निलंबित किया जाना सीसीए रूल्स के प्रावधानों के विरुद्ध होने से गैर कानूनी और विधि विरुद्ध है।

3 जनवरी को पुन: ज्वाइन किया

डॉ. मिर्धा की ओर से बताया गया कि वे विभाग की अनुमति से 3 दिसम्बर 2021 से अवकाश पर रहा और 3 जनवरी 2022 को वापिस ज्वाइन किया। ज्वाइन करते ही, बिना किसी उचित कारण के और एक महिला चिकित्सक की अबॉर्शन लीव स्वीकृत नहीं करने की झूठी शिकायत की बिना प्रथमदृष्ट्या जांच किए, निलम्बन आदेश सात जनवरी को जारी कर दिया। वस्तुत: उक्त महिला चिकित्सक की अबॉर्शन लीव वे 20 जुलाई 2021 को ही स्वीकृत कर चुके थे। याचीकाकर्ता सीएमएचओ पद की राज्य स्तरीय वरियता सूची में द्वितीय स्थान पर हैं। इन दलीलों के आधार पर निलंबन आदेश पर रोक लगाने की अपील की गई।

रिकॉर्ड देख लगाई अंतरिम रोक

न्यायाधीश अरुण भंसाली ने रिकॉर्ड देखने के बाद निलम्बन आदेश की क्रियान्विति पर अंतरिम रोक लगाते हुए स्वास्थ्य सचिव, राजस्थान सरकार सहित कार्मिक विभाग और उपशासन सचिव, चिकित्सा विभाग जयपुर को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

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