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ऐम्स में हार्टअटैक के बाद वाल्व लिकेज से पीड़ित की जान ऑपरेशन करके बचाई

जोधपुर,एम्स में हार्ट अटैक से खराब हुए हृदय वॉल्व के गंभीर मरीज की कोरोनरी आर्टरी बायपास के साथ हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई ı एम्स जोधपुर के कार्डियो थोरेसिक विभाग में 65 वर्षीय मरीज जिसे गंभीर दिल का दौरा पड़ा था जिसकी वजह से उसके हृदय के माइट्रल वॉल्व में लिकेज होने के कारण गंभीर अवस्था में हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी के साथ कोरोनरी आर्टरी बायपास सर्जरी सफलतापूर्वक की गई कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुरेंद्र पटेल ने बताया कि 65 वर्ष के वृद्ध रोगी को गंभीर दिल का दौरा पड़ा था एवं उसका एक हृदय वॉल्व (माइट्रल वॉल्व) भी दिल का दौरा पड़ने से खराब होके लिकेज करने लग गया था।

रोगी को 19 दिसम्बर को सीने में दर्द और सांस लेने में कठिनाई की शिकायत के साथ कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गयाı कार्डियोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉक्टर अतुल कौशिक और उनकी टीम ने मरीज को इंट्रा ओर्टिक बैलून पंप (आईएबीपी) लगाकर मरीज को स्थिर कर एंजियोग्राफी की जांच की गई जिसमें हृदय की तीनो प्रमुख धमनियों में रुकावट का पता चला और हृदयभी35% ही काम कर रहा थाı कार्डियक क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में मरीज को दो बार कार्डियक अरेस्ट हुआ, जिसे तुरंत सीपीआरकर मरीज को बचाया गया और मरीज को आपातकालीन कोरोनरी आर्टरी बाईपास के साथ वॉल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी के लिए कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग में भेजा गयाı

डॉ सुरेंद्र पटेल ने बताया कि इतनी गंभीर स्थिति में कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी के साथ-साथ वॉल्व को रिपेयर करना या बदल कर दूसरा वॉल्व लगाने की सर्जरी करना बहुत चुनौतीपूर्ण था क्योंकि दिल का दौरा पड़ने एवं वॉल्व में लिकेज होने की वजह से मरीज के फेफड़े खराब हो गए थे (पलमोनरी इडिमा) एवं मरीज कार्डियोजेनिक शॉक में थाı डॉ पटेल ने कहा कि 30 दिसम्बर को आपात कालीन सर्जरी की गई लगभग 8 घंटे चली सर्जरी में मरीज के हृदय की तीनों मुख्य धमनियों की बाईपास सर्जरी की गई एवं हृदय के खराब वॉल्व को बदलकर धातु का वाल्व लगाया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को 4 दिनों तक वेंटिलेटर और अन्य जीवन रक्षक दवाइयों पर गंभीर निगरानी में रखा गया इंट्रा ओर्टिक बैलून पंप को कुल 11 दिनों के बाद हटा दिया गया।

कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि यह एक बहुत ही उच्च जोखिम वाली सर्जरी थी तथा इस तरह के केस में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। इस संस्थान का यह पहला केस था जिसे सफलतापूर्वक किया गया और अब मरीज पूर्णतया स्वस्थ है। ऑपरेशन डॉ सुरेंद्र पटेल के नेतृत्व में किया गया और ऑपरेशन में डॉ आलोक कुमार शर्मा, डॉ दानिश्वर मीणा, डॉ मधुसूदन कट्टी, डॉ अनुपम दास, डॉ प्रमोद और डॉ अनिरुद्ध का सहयोग रहा एवं कार्डियक एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों की टीम में डॉ सादीक मोहम्मद, डॉ मनोज कमल, डॉ राकेश और डॉ रिचा का सहयोग रहा।

गहन चिकित्सा इकाई में डॉक्टरों की टीम में डॉ प्रदीप भाटिया, डॉ निखिल कोठारी,डॉ भरत पालीवाल और आईसीयू में पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल में शामिल सभी जूनियर एवं सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों एवं नर्सिंग अधिकारी तथा कार्डियक परफ्यूजनिस्ट कमलेश पवार, देवेंद्र, पूजा, अनिता और योगिता कार्डियक ओटी नर्सिंग ऑफिसर अजीत, गोमा राम,स्वाति,राजवीर,मनराराम, ज्योत्सना,नेहा,संजय और कानाराम ओटी टेक्निशिन मांगीलाल और विजय का भी सहयोग सराहनीय रहा।

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