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 भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले शेखावत

उदयपुर, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने निकाय चुनाव नतीजों को इस तरह पेश करने की कोशिश की, जैसे उन्होंने बहुत बड़ा तीर मार लिया। मैं पूछना चाहता हूं कि आपकी सरकार प्रदेश में होते हुए भी, जब तीन साल शासन के बचे हैं, उसके बावजूद जनता ने आपको 50 प्रतिशत सीटें भी नहीं दीं। स्पष्ट है कि जनता को यह सरकार किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है। जनता आपको नकार चुकी है। केन्द्रीय मंत्री शेखावत जोधपुर प्रवास के बाद सोमवार को पहले अनूपगढ़ और फ़िर उदयपुर पहुंचे। उदयपुर में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में शेखावत ने कहा कि गहलोत सरकार पहले दिन या कहें चुनाव परिणाम के बाद से आपसी विग्रह का शिकार है। सरकार विभिन्न खेमों में बंटी हुई है। ये खेमे आपस में संघर्षरत हैं। इसी कारण सरकार अस्थिर बनी हुई है और इसका दोष दूसरों के सिर फोड़ने का प्रयास मुख्यमंत्री लगातार कर रहे हैं। किसान आंदोलन पर शेखावत ने कहा कि किसानों को भ्रमित कर सड़क पर लाने की कुचेष्टा कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने की है। ये लोग किसान के बेटे के साथ खिलवाड़ करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक सीमित क्षेत्र को छोड़कर देशभर के किसानों ने तीनों कृषि कानूनों पर अपनी सहमति और खुशी जाहिर की है। अभी राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव में किसानों ने भाजपा को वोट करके इन कानूनों पर मोहर लगाई है। कांग्रेस जो इन कानूनों को लेकर स्वांग कर रही थी, उसे सीधा-सीधा जवाब दिया है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि माओवादी, नक्सलवादी और देश विरोधी ताकतें इस आंदोलन को अधिग्रहित कर चुकी हैं। ये लोग इस आंदोलन को बनाए रखने में अपना हित समझते हैं। इन लोगों का भारत की हितों के साथ प्रत्यक्ष जुड़ाव नहीं है। विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़े सवाल पर शेखावत ने कहा कि भाजपा पर आरोप लगाए गए कि हमारे लोगों को कैद किया गया है। हमारे 19 विधायकों के टेलीफोन ले लिए गए हैं। वो परिवार से बात नहीं कर पा रहे। 25-25 करोड़ में विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश हो रही है। 34-35 दिन बाद क्या परिणाम आए ? क्या वो 19 विधायक दूध पीते बच्चे थे कि कोई उनको रोककर रख सकता था। किसी एक विधायक ने ऐसा बयान दिया कि उनके लिए बाउंसर लगाए गए थे। क्या एक भी विधायक ने इस बात की थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने इस सच्चाई को बताया है कि बीटीपी विधायकों को राज्यसभा चुनाव और सरकार बचाने के लिए कितने-कितने रुपए दिए गए हैं। एक बार फिर कांग्रेस पार्टी यही राग अलाप रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब स्वामीनाथ आयोग ने 2006 में रिपोर्ट दे दी थी तो क्यों यूपीए सरकार उसे तकिया बनाकर सोती रही, क्यों उसे लागू करने का साहस नहीं दिखाया। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में इस बात का उल्लेख किया था कि हम मंडी व्यवस्था को परिवर्तित करेंगे। जब मोदी सरकार ने यह निर्णय किए तो इनको दोष क्यों दिखाई देता है। आप घोषणा करें और लागू करें तो वो निर्णय उचित है, कोई दूसरी सरकार उसे लागू करे तो किसान हित के बजाय आपकी राजनीतिक हित आड़े आ जाते हैं। यह देश अच्छी तरह देख भी रहा है और समझ भी रहा है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में एपीएमसी कानून में परिवर्तन के लाभ देखने को मिल रहे हैं। शेखावत ने कहा कि मंडियों के खत्म होने की अफवाह फैलाई जा रही है, जबकि मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद मंडियों के सुदृढ़ीकरण का काम किया है। 1000 से ज्यादा मंडियों को इलेक्ट्रोनिक ट्रेड में बदलने का काम किया। वन मार्केट वन नेशन से किसानों को लाभ हो रहा है। मैं पूछना चाहता हूं कि यदि किसान का बेटा अपनी उपज को दक्षिण भारत में बेचना चाहता है तो हर्ज किया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के दो निर्णयों, एमएसपी और सरकारी खरीद बढ़ाने से पिछले 5 साल में किसान के घर 3.25 लाख करोड़ रुपए अतिरिक्त गया है। प्रेसवार्ता के दौरान मंत्री शेखावत ने नए कृषि कानूनों के विरोध की आड़ में हो रहे षड्यंत्र पर अपनी बात प्रमुख रूप से रखी और कहा केन्द्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लगातार प्रयास कर रही है। मोदीज द्वारा बनाई गई नीतियों में किसी प्रकार का कोई दुराव – छिपाव नहीं है। नया कृषि कानून अन्नदाता की तरक्की को ध्यान में रखकर बनाया गया है लेकिन भोले – भाले किसान भाइयों के नाम पर कुछ दल अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में लगे हैं। इस कानून में भ्रम और आशंका की कोई जगह नहीं है। सच्चाई यह है कि नए सुधारों से किसान चिंतामुक्त होंगे। केंद्र सरकार उनके पक्ष में हर कदम पर खड़ी है।शेखावत ने कहा कि राजस्थान सरकार के मुखिया अशोक गहलोत को अनर्गल विरोध करने के बजाय सच्चाई का आइना देखना चाहिए। राजस्थान में किसानों का बुरा हाल किसी से छिपा नहीं है। उनकी कांग्रेस पार्टी ने 70 साल सत्ता में रहते हुए अन्नदाताओं की सुध ली होती तो आज हर क्षेत्र में बड़े सुधारों की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने अपने अभी तक के कार्यकाल में अगर राजस्थान की सुध ली होती तो प्रदेश में कानून व्यवस्था की यह हालत ना होती, प्रदेश वासी अपने आप को सुरक्षित महसूस करते।

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