विधि संकाय में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आज से
- जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय
- विषय: भारत में कानून और समाज के बदलते आयामः मुद्दे और चुनौतियां
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),विधि संकाय में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आज से। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के विधि संकाय में प्रधानमंत्री उन्नत शिक्षा अभियान (PM-USHA) के तत्वावधान में 20 एवं 21 फरवरी को दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय “भारत में कानून और समाज के बदलते आयामः मुद्दे और चुनौतियां” है,जो वर्तमान समय में विधि और समाज के अंतर्संबंधों पर गंभीर मंथन का अवसर प्रदान करेगा।
सम्मेलन का उद्देश्य समकालीन भारतीय समाज में विधि व्यवस्था के परिवर्तित स्वरूप,सामाजिक न्याय की अवधारणा, संवैधानिक मूल्यों की प्रासंगिकता, मानवाधिकार संरक्षण,लैंगिक समानता, डिजिटल कानून,साइबर अपराध, पर्यावरणीय न्याय तथा न्यायिक सुधार जैसे ज्वलंत विषयों पर गहन विमर्श करना है। विषय की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए देशभर के विश्वविद्यालयों एवं विधि संस्थानों से प्रोफेसर,शोधार्थी एवं विद्यार्थी अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ सुभाष चन्द्र राय,डीन अनुसंधान एवं विकास,चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्व विद्यालय उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ पवन कुमार शर्मा,कुलगुरु, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय करेंगे।आयोजन अध्यक्ष के रूप में विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रो.डॉ सुनील आसोपा तथा आयोजन सचिव के रूप में डॉ शीतल प्रसाद मीना की उपस्थिति रहेगी।
समाज के पंचों पर हुक्का पानी बंद कर बहिष्कृत करने का आरोप
सम्मेलन की आयोजन समिति में डॉ नवदीप दाधीच,डॉ दीपक निकुब,डॉ सुरभि एवं डॉ श्वेता भूमिका निभा रहे हैं। तकनीकी कार्य का दायित्व अभिषेक संभाल रहे हैं,जबकि मीडिया समन्वय का कार्य जुजार सिंह परमार कर रहे हैं। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें संवैधानिक चुनौतियां,न्याय तक पहुंच,विधि और सामाजिक परिवर्तन, डिजिटल युग में निजता का अधिकार, साइबर अपराध,पर्यावरणीय विधि तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी।
यह सम्मेलन न केवल शोधार्थियों और विद्यार्थियों को अपने विचार प्रस्तुत करने का मंच प्रदान करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविदों के साथ संवाद स्थापित करने का भी महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराएगा।विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह आयोजन विधि एवं समाज के मध्य बदलते संबंधों को समझने तथा समकालीन चुनौतियों के समाधान हेतु ठोस सुझाव प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं तथा देशभर से प्रतिभागियों का आगमन प्रारंभ हो चुका है।
