हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों को आयोग ने किया तलब
- राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग
- आदेश की अवहेलना करने पर तलब
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों को आयोग ने किया तलब। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग,जोधपुर ने आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मयंक बथवाल और प्रभारी अधिकारी सौरभ चतुर्वेदी को पचास पचास हजार रुपए के जमानती वारंट से 29 दिसंबर को आयोग के समक्ष तलब किया है। आयोग अध्यक्ष देवेंद्र कच्छवाहा,न्यायिक सदस्य अरुण कुमार अग्रवाल और सदस्य लियाकत अली ने हाईकोर्ट और आयोग के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना कर अवमानना करने पर अवमाननाकर्ता के खिलाफ यह आदेश जारी किया है।
अनीता भरत कुमार गर्ग ने अधिवक्ता अनिल भंडारी के माध्यम से इजराय प्रार्थना पत्र पेश कर कहा कि 6 सितंबर 2023 को आयोग ने प्रार्थी के पति की मृत्यु पर एक करोड़ रुपए दावा राशि मय ब्याज,दो लाख रुपए हरजाना और 50 हजार रुपए वाद व्यय अदा करने के आदेश दिए, जिसके खिलाफ बीमा कंपनी की अपील पर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने 16 अप्रैल 2024 को स्थगन आदेश जारी कर दिया। प्रार्थी की रिट याचिका पर राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने गत 14 जनवरी को 50 फीसदी राशि का भुगतान 31 मार्च तक प्रार्थी को अदा करने का आदेश दिया। बीमा कंपनी की ओर से राशि जमा नहीं करने पर 12 अगस्त को खंडपीठ ने बीमा कंपनी को दो सप्ताह में आदेश की पालना करने का निर्देश दिया और इसके अभाव में प्रार्थी को विपक्षी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की छूट प्रदान की।
9 सितम्बर को विपक्षी के यह कहने पर कि उन्होंने गलत जगह का ड्राफ्ट बना दिया था,खंडपीठ ने विपक्षी को सही डिमांड ड्राफ्ट दो सप्ताह में 15 हजार की कॉस्ट के साथ जमा कराने का आदेश दिया।
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अधिवक्ता भंडारी ने कहा कि विपक्षी ने न्यायालय के किसी भी आदेश की जानबूझकर पालना नहीं कर 19 नवंबर को आधी अधूरी राशि 72 लाख 27 हजार 630 रुपए राज्य उपभोक्ता आयोग के नाम से ड्राफ्ट बना कर जमा करवा दी,जबकि विपक्षी को सही राशि का ड्राफ्ट प्रार्थी के नाम से जमा करना था,सो अवमाननाकर्ता को जरिए वारंट तलब किया जाएं। राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि विपक्षी ने न्यायालय के किसी भी आदेश की पूर्ण पालना नहीं की। उन्होंने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य आयोग, जोधपुर के समक्ष राशि जमा करने का आदेश दिया था और कहा था कि राशि प्रार्थी को अदा की जाए।
उन्होंने कहा कि विपक्षी को यह जानकारी होते हुए कि राज्य आयोग का कोई बैंक खाता नहीं है,उन्होंने प्रार्थी के नाम से ड्राफ्ट नहीं बनाकर आयोग के नाम से बनाकर गलत किया है। अवमाननाकर्ता ने राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ के किसी भी आदेश की पालना नहीं की है सो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 72 के तहत उनको दंडित किया जाना न्यायोचित प्रतीत हो रहा है सो अवमाननाकर्ता को 50 -50 हजार रुपए के जमानती वारंट से 29 दिसंबर को आयोग को समक्ष तलब किया जाता है।
