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आईआईटी जोधपुर सुलझाएगी डीएनए की गुत्थी

  • जीनोमिक्स और आयरटेक में अग्रणी अनुसंधान
  • मानव स्वास्थ्य विविधता को समझने की दिशा में IIT जोधपुर का महत्वपूर्ण योगदान
  • प्रोफेसर मिताली मुखर्जी का अंतर्विषयी कार्य गढ़ रहा है जीनोमिक्स,आयुर्वेद,AI और मरु-पर्यावरण विज्ञान को जोड़कर प्रिसिशन हेल्थकेयर का भविष्य

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आईआईटी जोधपुर सुलझाएगी डीएनए की गुत्थी। क्यों एक ही DNA साझा करने वाले व्यक्ति-यहां तक कि एक ही परिवार के सदस्य बीमारियों और उपचारों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देते हैं? COVID-19 महामारी ने इस प्रश्न को अत्यंत स्पष्ट रूप से सामने रखा। यही प्रश्न IIT जोधपुर की प्रोफेसर, डॉ.मिताली मुखर्जी के अग्रणी अनुसंधान का केंद्र है। वे बायोसाइंस और बायो इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर हैं तथा स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस और सेंटर फॉर इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में एफिलिएट फैकल्ट्री हैं।

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प्रो.मुखर्जी,जो जीनोमिक्स, प्रिसिशन मेडिसिन,इवोल्यूशनरी बायोलॉजी और आयरजीनोमिक्स के संगम पर कार्यरत एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं,मानव स्वास्थ्य विविधता को आकार देने वाले आणविक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक घटकों को समझने के लिए एक रूपांतर कारी प्रयास का नेतृत्व कर रही हैं। उनका शोध विशेष रूप से शुष्क और चरम पर्यावरण वाले क्षेत्रों की जनसंख्या के लिए संदर्भ-आधारित, व्यक्तिगत और सतत स्वास्थ्य समाधान विकसित करने पर केंद्रित है।

चरम पर्यावरण में मानव स्वास्थ्य को समझना
थार DESIGNS पहल
IIT जोधपुर में प्रो.मुखर्जी थार DESIGNS (Desert EcoSystem Innovations Guided by Nature and Selection) के अंतर्गत अग्रणी शोध का नेतृत्व कर रही हैं- यह एक प्रमुख पहल है जो यह अन्प्रेषण करती है कि जीवन किस प्रकार थार मरुस्थल की ऊँचे तापमान,तीव्र UV विकिरण और जल-अभाव वाली परिस्थितियों में अनुकूलित होता है।

उनकी टीम यह अध्ययन कर रही है कि चरम पर्यावरणीय दबाव मेटाबॉलिज्म,कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य,श्वसन रोगों और दीर्घ कालीन रोग परिवर्तन को कैसे प्रभावित करते हैं। जीनोमिक्स, मानवविज्ञान, और विकासवादी इतिहास के विश्लेषण के माध्यम से वे थार की मूल जनसंख्या-जो सदियों की प्रव्रजन और सांस्कृतिक विकास से बनी है-में यह समझ विकसित कर रही हैं:

किस प्रकार आनुवांशिक विविधताएँ शुष्क क्षेत्रों के अनुकूलन में सहायक होती हैं
पारंपरिक प्रथाएँ जैविक सहनशीलता से कैसे जुड़ी होती हैं
पर्यावरणीय तंत्र और मानव स्वास्थ्य किस प्रकार परस्पर निर्भर हैं। यह परियोजना इंजीनियरिंग, पारिस्थितिकी और चिकित्सा विज्ञान के विशेषज्ञों की बहु-विषयी टीम द्वारा सशक्त बनाई गई है।

इस पहल का एक अनूठा घटक है पक्षियों का पारिस्थितिक संकेतक के रूप में उपयोग,जिसमें नागरिक विज्ञान भी शामिल है। स्थानीय समुदायों और बर्डवॉचर्स से प्राप्त वास्तविक समय का डेटा जैव विविधता,जलवायु संकेतों और पर्यावरणीय परिवर्तनों का मानचित्र तैयार करने में मदद करता है।

थार DESIGNS के माध्यम से IIT जोधपुर चरम पर्यावरण में स्वास्थ्य अध्ययन के लिए वैश्विक ढांचा तैयार कर रहा है-जो जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते रोग पैटर्न की पृष्ठभूमि में अत्यंत प्रासंगिक है।
AyurTech: प्रिसिशन हेल्थकेयर के लिए आयुर्वेद और अत्याधुनिक तकनीक का समेकन प्रो.मुखर्जी के शोध का एक अन्य प्रमुख स्तंभ है AyurTech-जो आयुर्वेद, जीनोमिक्स,AI, मशीन लर्निंग,NLP और सिस्ट्म्स बायोलॉजी का एक उन्नत समागम है। इसका आधार है आयरजीनोमिक्स,एक उभरता हुआ क्षेत्र जिसे प्रो.मुखर्जी ने बीते दो दशकों में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयरजीनोमिक्स का उद्देश्य आयुर्वेद की व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी अवधारणाओं-विशेष रूप से प्रकृति को आधुनिक आणविक और जीनोमिक उपकरणों से वैज्ञानिक रूप से समझना है। IIT जोधपुर में AyurTech इसे क्लीनिकल, तकनीकी और समेकित चिकित्सा समाधानों में परिवर्तित कर रहा है, जिनमें शामिल हैं,प्रकृति और फीनोटाइप आकलन के लिए AI-आधारित कंप्यूटर विज़न उपकरण,जीनोमिक,एपिजेनेटिक, जीवनशैली और आयुर्वेदिक डेटा को जोड़ने वाले मशीन लर्निंग मॉडल प्रिसिशन डायग्नोस्टिक्स और थेरेप्यूटिक्स के लिए एविडेंस-बेस्ड प्रोटोकॉल,निजीकृत और निवारक स्वास्थ्य के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म,AyurTech आयुर्वेद,आधुनिक चिकित्सा, बायो टेक्नोलॉजी,कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों को एक साथ लाता है, जिससे IIT जोधपुर उन चुनिंदा वैश्विक संस्थानों में शामिल हो गया है जो पारंपरिक ज्ञान और अत्याधुनिक विज्ञान का इस पर एकीकृत अनुसंधान कर रहे हैं।

प्रो.मिताली मुखर्जी का वक्तव्य
“मानव स्वास्थ्य हमारे जीन, पर्यावरण,सांस्कृतिक परंपराओं और विकासवादी इतिहास-इन सभी के संयुक्त प्रभाव से आकार लेता है। IIT जोधपुर में हम जीनोमिक्स, आयरजीनोमिक्स,AI और पारिस्थितिक विज्ञान के माध्यम से इन परतों को एक साथ बुन रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य समाधान अधिक व्यक्तिगत,वैज्ञानिक एवं संदर्भ-संगत बन सकें। थार मरुस्थल और AyurTech में हमारा कार्य यह दर्शाता है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान मिलकर स्थायी स्वास्थ्य एवं सहनशीलता के नए मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
प्रो. मिताली मुखर्जी, IIT जोधपुर

संदर्भ-संगत,समावेशी और प्रिसिशन स्वास्थ्य के नए युग की ओर
प्रो.मुखर्जी के नेतृत्व में IIT जोधपुर विज्ञान,तकनीक,संस्कृति और पारिस्थितिकी के मिलन-बिंदु के रूप में उभर रहा है। स्वास्थ्य विविधता को समझने से लेकर मरु-अनुकूल सहनशीलता के अध्ययन और AI-सहायक आयुर्वेदिक उपकरणों के विकास तक,उनका कार्य इन क्षेत्रों में रूपांतरणकारी योगदान दे रहा है।

-व्यक्तिगत चिकित्सा
-जलवायु-संवेदनशील स्वास्थ्य रणनीतियाँ
-चरम पर्यावरणों में सतत रोग प्रबंधन
-वैज्ञानिक सत्यापन आधारित समेकित चिकित्सा

उनका शोध IIT जोधपुर की उस प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करता है जिसमें स्थानीय जड़ों से जुड़ी, वैश्विक महत्व की वैज्ञानिक रूप से दृढ़ नवाचार को आगे बढ़ाया जा रहा है।

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