17 दिन बाद भी साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का सस्पेंस बरकरार
- पुलिस ने मेडिकल कॉलेज को सौंपी एफएसएल रिपोर्ट
- एक्सपर्ट डॉक्टर्स की राय मांगी
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),17 दिन बाद भी साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का सस्पेंस बरकरार।कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में एफएसएल रिपोर्ट आ चुकी है। प्रारंभिक तौर पर सामने आया है कि रिपोर्ट में साध्वी को जहर देने या दूसरे अप्राकृतिक कारणों से मौत होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके साथ ही उनके साथ किसी तरह की गलत घटना के सबूत भी नहीं मिले हैं।
इसके बाद पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश पासवान,डीसीपी विनीत बंसल और एसआईटी प्रभारी एसीपी छवि शर्मा डॉ एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचे। तीनों ने कॉलेज के प्राचार्य डॉ बीएस जोधा से इस मामले में चर्चा करते हुए एफएसएल रिपोर्ट सौंपी। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के साथ एक मेडिकल बोर्ड बनाकर एफएसएल रिपोर्ट पर विशेषज्ञ की राय मांगी।
दरअसल एफएसएल रिपोर्ट गुरुवार रात पुलिस कमिश्नर को मिल गई थी। अब पोस्टमार्टम करने वाले मेडिकल बोर्ड के डॉक्टर रिपोर्ट का एनालिसिस कर मौत के कारणों का खुलासा करेंगे। प्राचार्य डॉ जोधा ने बताया कि साध्वी प्रकरण पर ओपिनयन को लेकर आग्रह किया गया है। इसके लिए हम बोर्ड बना रहे हैं। कल शाम तक रिपोर्ट देने का प्रयास है। एसआईटी प्रभारी एसीपी छवि शर्मा ने बताया कि साध्वी मामले में जितनी भी एजेंसी से रिपोर्ट मिली है,उन पर एक्सपर्ट की राय ले रहे हैं। एफएसएल की विसरा रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को दी है।
मेडिकल कॉलेज का मेडिसिन विभाग अन्य विभागों के डॉक्टर्स को रिपोर्ट भेज कर उस पर एक्सपर्ट की राय लेगा। राय लेने के बाद रिपोर्ट पुलिस को दी जाएगी। पुलिस उसी रिपोर्ट के आधार पर अपनी जांच को आगे बढ़ाएगी। अगर डॉक्टर्स की राय में मृत्यु का कारण अप्राकृतिक हुआ,तो संभवत पुलिस को फिर मशक्कत करनी पड़ेगी।
11 दिन में पूरी हुई एफएसएल जांच
जोधपुर शहर के पाल रोड के आरती नगर स्थित आश्रम में 28 जनवरी को साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें जुकाम हो गया था। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी गई थी। कंपाउंडर देवी सिंह ने दो इंजेक्शन लगाए। इसके बाद उनकी मौत हो गई थी। 29 जनवरी को देर शाम पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया। तीस जनवरी को बाड़मेर के परेऊ में साध्वी प्रेम बाईसा को समाधि दी गई। अगले दिन 31 जनवरी और 1 फरवरी को शनिवार-रविवार का अवकाश था। ऐसे में दो फरवरी को विसरा सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। 11 दिन में एफएसएल जांच पूरी हुई। इसके बाद रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई।
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अब तक 48 लोगों से पूछताछ
पुलिस ने इस मामले की गहन जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की,जिसने अब तक 48 लोगों से पूछताछ की, 500 से अधिक पेज के पूछताछ नोट तैयार किए। एसआईटी ने 40 से ज्यादा मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रेकॉर्ड निकाले। राज्य की एफएसएल ने विसरा जांच रिपोर्ट 11 दिन बाद सौंपी,जिसमें किसी भी प्रकार के जहर या विषाक्त पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई।
अप्राकृतिक कारणों के स्पष्ट संकेत भी नहीं मिले हैं। अब अंतिम मौत का कारण तय करने का जिम्मा मेडिकल बोर्ड पर है,जिसकी रिपोर्ट आने के बाद जांच की दिशा और साफ हो सकेगी। एसआईटी ने मामले की हर बारीकी खंगाली। आश्रम से 35 से अधिक सैंपल जुटाए गए,जिनमें डीएनए,फिंगर प्रिंट और अन्य फॉरेंसिक सबूत शामिल हैं।
पुलिस ने अस्पताल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया एक्टिविटी की भी जांच की। शुरुआत में मौत को दवा के एलर्जिक रिएक्शन या लापरवाही से जोड़ा गया,लेकिन सुसाइड नोट पोस्ट होने से साजिश के सवाल उठे। साध्वी प्रेम बाईसा पिछले साल जुलाई में एक वायरल वीडियो के कारण ब्लैकमेल और मानसिक उत्पीडऩ का शिकार हुई थीं। उस मामले में आरोपी गिरफ्तार हुआ था,लेकिन वीडियो दोबारा वायरल होने से उन्हें परेशानी हुई। कुछ लोग इसे मौत से जोडक़र देख रहे हैं, लेकिन पुलिस ने अभी तक किसी साजिश की पुष्टि नहीं की।
सवाल जिसका जवाब बाकी
साध्वी को डेक्सोना व डायनापार इंजेक्शन लगाए गए थे। कंपाउंडर देवी सिंह ने पुलिस को दिए बयान में यह इंजेक्शन साध्वी से मिली पर्ची के आधार पर लगाने की जानकारी दी,जबकि पाल रोड स्थित प्रेक्षा अस्पताल के डॉक्टर ने पिछले काफी समय से साध्वी की जांच करने तक से इनकार किया था। ऐसे में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इंजेक्शन किसने लिखे थे? जिसके आधार पर लगाए गए इसका जवाब एसआईटी को ढूंढना होगा।
